

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक भ्रमण की अहम भूमिका को एक बार फिर सार्थक रूप में देखा गया, जब पूर्वी चंपारण के पहाड़पुर स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल के करीब सौ छात्र-छात्राओं की टीम शिक्षकों के साथ पश्चिमी चंपारण के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों के भ्रमण पर निकली। इस शैक्षणिक यात्रा का मुख्य पड़ाव रहा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, जहां पहुंचकर बच्चों का उत्साह देखने लायक था। विद्यालय के एमडी रामदयाल साह ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों को वास्तविक जीवन और ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अभिभावकों के सहयोग से इस भ्रमण का आयोजन किया गया। यात्रा की शुरुआत लौरिया नंदनगढ़ से हुई, जहां स्थित प्राचीन बौद्ध स्तूप और पौराणिक अवशेषों का बच्चों ने अवलोकन किया। इतिहास के शिक्षक ने नंदनगढ़ के ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से समझाया, जिससे बच्चों को प्राचीन भारत की सभ्यता और संस्कृति की गहरी जानकारी मिली। इसके बाद टीम “बिहार का कश्मीर” कहे जाने वाले वाल्मीकिनगर पहुंची। यहां बच्चों को वाल्मीकि आश्रम का भ्रमण कराया गया, जहां माता सीता और लव-कुश से जुड़ी पौराणिक कथाओं की जानकारी दी गई। चैत्र नवरात्र के अष्टमी होने के कारण बच्चों ने नर देवी मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। भ्रमण के दौरान बच्चों को व्यवस्थित और जानकारीपूर्ण तरीके से समझाने के लिए पोर्टेबल ध्वनि विस्तार यंत्र का उपयोग किया गया। छात्रों को पंक्तिबद्ध कर जंगल में पाए जाने वाले पेड़-पौधों और वनस्पतियों के बारे में विस्तार से बताया गया। इस दौरान बच्चों ने जंगल कैंप के सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें खींचकर इस यादगार यात्रा को संजोया। वन विभाग के इको पार्क वाल्मीकिनगर में छोटे बच्चों के लिए लगाए गए झूले विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने यहां खेलकूद के साथ-साथ प्रकृति का आनंद भी लिया। इको पार्क के वॉच टावर पर चढ़कर उन्होंने नेपाल के सुंदर दृश्यों को नजदीक से देखा, जो उनके लिए एक अनोखा अनुभव रहा। इस दौरान रेंजर सत्यम कुमार ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें पानी और बिस्किट वितरित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कुल मिलाकर यह शैक्षणिक भ्रमण बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक और यादगार साबित हुआ।










