वीटीआर की वादियों में रोमांच का सफर, सफारी के दौरान दिखे भालू और गौर के झुंड, पर्यटक हुए मंत्रमुग्ध।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर: बिहार-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) की हरियाली और जैव विविधता एक बार फिर पर्यटकों का दिल जीत रही है। बुधवार की सुबह जंगल सफारी पर निकले सैलानी उस समय रोमांच से भर उठे, जब उन्होंने खुले जंगल में एक साथ दो भालुओं को विचरते देखा। इसके साथ ही गौर (जंगली भैंस) का विशाल झुंड भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बेतिया, मुंगेर और नेपाल के बीरगंज से पहुंचे पर्यटकों ने इस दुर्लभ नजारे को कैमरों में कैद किया और खुशी जाहिर की। कई पर्यटकों ने बताया कि उन्होंने पहली बार जंगल के प्राकृतिक माहौल में चीतल, सांभर और बर्किंग हिरण को एक साथ उछलते-कूदते देखा। उनके अनुसार, यह अनुभव किसी वाइल्डलाइफ फिल्म से कम नहीं था। हालांकि, कुछ पर्यटक रॉयल बंगाल टाइगर को देखने की उम्मीद लेकर आए थे। बाघ के दर्शन नहीं होने का उन्हें थोड़ा मलाल जरूर रहा, लेकिन वीटीआर की घनी हरियाली, पहाड़ियों की गहराई और पक्षियों की मधुर चहचहाहट ने उनके अनुभव को यादगार बना दिया।
बेतिया से आए पर्यटक अमित कुमार सिंघानिया ने बताया कि वाल्मीकिनगर का प्राकृतिक सौंदर्य उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक खूबसूरत है। उन्होंने कहा, “हमने सोचा भी नहीं था कि बिहार-नेपाल सीमा पर बसा यह क्षेत्र इतना मनमोहक होगा। यहां का दृश्य किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल से कम नहीं है।”वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के अनुसार, वीटीआर में वन्यजीवों की समृद्ध विविधता पाई जाती है। यहां बाघ, भालू, तेंदुआ और गौर के अलावा हिरणों की पांच प्रमुख प्रजातियां—चीतल, सांभर, बर्किंग हिरण और चार सींग वाला हेग डियर—बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ये हिरण प्रजातियां बाघों के प्रमुख आहार भी हैं, जिससे यहां का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत बना रहता है। इधर, पर्यटकों ने वाल्मीकि आश्रम के विकास की भी मांग उठाई। आश्रम भ्रमण के बाद उन्होंने कहा कि लव-कुश की जन्मस्थली माने जाने वाले इस पौराणिक स्थल पर अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यदि केंद्र और राज्य सरकार यहां पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करें, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है। पर्यटकों का मानना है कि प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व का अद्भुत संगम वाल्मीकिनगर को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बना सकता है। जरूरत है तो बस सुनियोजित विकास और बेहतर सुविधाओं की, जिससे यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो सके।

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