

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- इंडो नेपाल सीमा से सटे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को उस वक्त रोमांचक अनुभव हुआ, जब उनका सामना ‘आर-फाइव’ नामक विशालकाय गेंडे से हो गया। सिवान से आए पर्यटकों ने मोटर अड्डा जंगल क्षेत्र में इस दुर्लभ नजारे को अपने कैमरे में कैद किया और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
पर्यटकों ने बताया कि जंगल की वास्तविक सुंदरता बाहर से नहीं, बल्कि भीतर जाने पर महसूस होती है। घने जंगलों के बीच पक्षियों की मधुर चहचहाहट, हिरणों की उछल-कूद और अचानक सामने आए गेंडे ने उनके सफर को यादगार बना दिया। सिवान के पर्यटक महेश किशोर सिंह ने कहा कि बाघ का दीदार नहीं हो सका, लेकिन गेंडे को करीब से देखना उनके लिए किसी रोमांच से कम नहीं रहा। वाल्मीकिनगर, जिसे “बिहार का कश्मीर” भी कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां चारों ओर फैले जल, जंगल और पहाड़ पर्यटकों को गोवा और कश्मीर जैसी अनुभूति कराते हैं। वीटीआर में लगभग 300 प्रजाति के पक्षियों के साथ सैकड़ों शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों का निवास है, जो इसे जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं।
वीटीआर में एक नर और एक मादा गेंडा जंगल की शोभा बढ़ा रहे हैं। पूर्वी छोर पर नर गेंडा और पश्चिमी क्षेत्र भेड़िहारी जंगल में मादा गेंडे का अधिवास है। खास बात यह है कि गेंडा शाकाहारी होने के बावजूद बड़े आकार के कारण मांसाहारी जीवों से सुरक्षित रहता है। वन प्रशासन द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण और आवास सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डिवीजन-2 क्षेत्र में 140 हेक्टेयर (लगभग 346 एकड़) भूमि पर नया ग्रासलैंड विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ाना है, जिससे बाघों के संरक्षण और संवर्धन को भी मजबूती मिले। वर्तमान में वीटीआर में बाघों की संख्या 60 के पार पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष 54 थी। वहीं गौर की संख्या 400 से अधिक हो गई है और तेंदुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इन प्रयासों से न केवल वन्यजीव संरक्षण को बल मिल रहा है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। जंगल सफारी के दौरान गेंडे के इस रोमांचक दीदार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।










