गर्मी से पहले ही वन विभाग हाई अलर्ट पर, तैयारियों का ब्लूप्रिंट तैयार।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर :- वीटीआर के जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। अमूमन हर साल अप्रैल माह की शुरुआत के साथ जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं, जिससे वन संपदा, वन्यजीव और पर्यावरण को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी खतरे को देखते हुए इस बार विभाग ने पहले से ही व्यापक रणनीति बनाकर तैयारी शुरू कर दी है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग की घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। पंचायत स्तर पर बैठकों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इन बैठकों के माध्यम से लोगों को जंगल में आग लगने के कारण, उसके दुष्परिणाम और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। वाल्मीकि नगर रेंजर सत्यम कुमार ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जंगल में आग लगाता हुआ दिखाई दे या कहीं आग लगने की आशंका हो, तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग के स्थानीय कार्यालय या संबंधित फॉरेस्ट गार्ड को दें। समय पर सूचना मिलने से बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है।

फायर अलर्ट सिस्टम बना सबसे बड़ा हथियार

इस बार वन विभाग ने तकनीक का सहारा लेते हुए “फायर अलर्ट सिस्टम” को सक्रिय कर दिया है। यह सिस्टम फॉरेस्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया के सहयोग से संचालित हो रहा है। इसके तहत विभाग के सभी कर्मचारियों के मोबाइल नंबर इस सिस्टम से जोड़े गए हैं। अब जैसे ही किसी जंगल में आग लगने की घटना होती है, तुरंत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल पर अलर्ट मैसेज पहुंच जाएगा। इससे टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कार्रवाई शुरू कर सकेगी। इस तकनीक के उपयोग से प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाएगा और नुकसान को सीमित किया जा सकेगा।

टीमवर्क से मिलेगी सफलता

बड़े स्तर पर आग लगने की स्थिति में अकेले विभाग नहीं, बल्कि फायर ब्रिगेड और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से संयुक्त रूप से अभियान चलाया जाएगा। विगत वर्ष आगजनी की कई घटनाओं में बड़े पैमाने पर जंगल प्रभावित हुए थे, जिससे इस बार विभाग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ा खतरा

गर्मी की दस्तक के साथ ही जंगलों में सूखी पत्तियां और घास आग को तेजी से फैलाने में मदद करती हैं। यही कारण है कि इस मौसम में छोटी सी चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए वाल्मीकिनगर रेंज में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कुल मिलाकर, वन विभाग इस बार पहले से ज्यादा तैयार और सक्रिय नजर आ रहा है। तकनीक, जनभागीदारी और त्वरित कार्रवाई के संयोजन से जंगलों को आग से बचाने की दिशा में एक मजबूत पहल की गई है। अब यह देखना होगा कि ये तैयारियां कितनी कारगर साबित होती हैं और जंगलों को सुरक्षित रखने में कितनी सफलता मिलती है।

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