

जिला ब्यूरो बेतिया विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट..
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकिनगर की वादियों में उस समय भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब सिवान जिले के जीरादेई स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की दृष्टि बाधित दिव्यांग छात्राओं की एक टीम भ्रमण के लिए यहां पहुंची। आंखों से देखने में असमर्थ इन बच्चियों ने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रकृति, इतिहास और पर्यटन स्थलों को महसूस कर एक अनूठा अनुभव प्राप्त किया।
दृष्टि दोष से ग्रसित इन छात्राओं का उत्साह और जिज्ञासा देखते ही बन रहा था। वे भले ही प्राकृतिक सुंदरता को देख नहीं पा रही थीं, लेकिन शिक्षकों के वर्णन और अपने स्पर्श के माध्यम से हर दृश्य को महसूस कर रही थीं। बच्चियां अपने शिक्षकों का हाथ पकड़कर अनुशासित ढंग से विभिन्न स्थलों का भ्रमण करती रहीं और हर नई जानकारी को बड़े ध्यान से सुनती रहीं। भ्रमण के दौरान छात्राओं ने इको पार्क, जंगल कैंप, कौलेश्वर झूला पुल सहित कई प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया। शिक्षकों ने उन्हें हर स्थान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया, जिससे बच्चियों की जिज्ञासा और भी बढ़ती गई। बच्चियां खुद को इस अनुभव के लिए बेहद भाग्यशाली मान रही थीं। हालांकि इस दौरान एक छोटा सा हादसा भी हुआ, जब भ्रमण के दौरान 10 दृष्टि बाधित बच्चियां रास्ता भटक गईं। इस घटना से टीम में कुछ समय के लिए हड़कंप मच गया। लेकिन स्थानीय युवक एवं समाजसेवी संगीत आनंद ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चियों को सुरक्षित उनके शिक्षकों से कालीघाट परिसर में मिलवा दिया। इसके बाद पूरी टीम ने राहत की सांस ली। विद्यालय की प्राचार्य विजयालक्ष्मी सिंह ने बताया कि दिशा का सही ज्ञान नहीं होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। बच्चियां एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चल रही थीं, लेकिन रास्ता भटक गईं। उन्होंने स्थानीय युवक के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मदद से एक बड़ी समस्या टल गई। इस भ्रमण के दौरान बच्चियों ने केवल सुना ही नहीं, बल्कि स्पर्श के जरिए भी कई चीजों को महसूस किया। गंडक नदी के किनारे पत्थरों को छूकर उन्होंने उनके स्वरूप को समझा, वहीं रुद्राक्ष के पेड़ को छूकर उसके बारे में शिक्षकों से जानकारी प्राप्त की। यह अनुभव उनके लिए किसी अद्भुत सीख से कम नहीं था। कालीघाट परिसर में बच्चियों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर अपनी खुशी का इजहार किया। उनकी मधुर आवाज सुनकर वहां मौजूद स्थानीय लोग भी भावुक हो उठे और झूमने लगे। इस पूरे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि यदि हौसले बुलंद हों, तो कोई भी बाधा जीवन के आनंद को महसूस करने से रोक नहीं सकती। यह भ्रमण न केवल इन दिव्यांग बच्चियों के लिए यादगार बना, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश छोड़ गया कि संवेदनशीलता और सहयोग से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है।










