जंगल की आग से निपटने की तैयारी तेज, वाल्मीकिनगर रेंज में पहुंचे पांच नए फायर ब्लोअर।

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बेतिया/वाल्मीकिनगर: गर्मी के मौसम में जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं से निपटने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में वाल्मीकिनगर रेंज में पांच नए लीफ ब्लोअर (फायर ब्लोअर) मशीन मंगाए गए हैं, जो जंगलों में आग को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डिवीजन दो के डीएफओ विकास अहलावत का मानना है कि इन मशीनों की मदद से आग पर जल्द काबू पाने में काफी सहूलियत होगी। दरअसल, गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार अत्यधिक गर्मी और तेज हवाओं के कारण सूखे पत्तों और घास में आग लग जाती है, तो कई बार आसपास के लोग भी लापरवाही या जानबूझकर आग लगा देते हैं। ऐसे में आग तेजी से फैलकर बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेती है और उसे बुझाने में वन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वन विभाग के अनुसार जंगलों में आग लगने और उसके फैलने में मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्म और शुष्क हवाएं जंगलों में आग को फैलाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने अगलगी की घटनाओं को रोकने के लिए फायर वॉचर की भी तैनाती की है। एक टीम में पांच सदस्य होते हैं, जो जंगल के विभिन्न हिस्सों में लगातार निगरानी करते रहते हैं ताकि कहीं भी आग लगने की घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके।

संपर्क तोड़ना आग बुझाने का सबसे प्रभावी तरीका

वन अधिकारियों के अनुसार जंगल में आग बुझाने का सबसे प्रभावी तरीका आग के संपर्क को तोड़ना होता है। जिस दिशा में आग बढ़ रही होती है, उस दिशा में कुछ दूरी तक सूखी लकड़ियां, पत्ते और घास को हटा दिया जाता है। इससे आग को आगे बढ़ने के लिए ईंधन नहीं मिलता और वह धीरे-धीरे खुद ही बुझ जाती है। फायर ब्लोअर मशीन इस प्रक्रिया में काफी मददगार साबित होती है। इस मशीन से तेज हवा के माध्यम से आग के आगे पड़े सूखे पत्तों और घास को हटाया जाता है। इससे आग को फैलने से रोका जा सकता है। साथ ही मशीन से निकलने वाली तेज हवा कई बार आग की लपटों को कम करने में भी मदद करती है।

फायर लाइन बनाकर भी बुझाई जाती है आग

वन विभाग जंगलों में आग बुझाने के लिए फायर लाइन बनाने की तकनीक का भी इस्तेमाल करता है। आग जिस दिशा में बढ़ रही होती है, उस दिशा में एक निर्धारित चौड़ाई तक सूखी घास और पत्तों को साफ कर दिया जाता है। इससे वहां ईंधन समाप्त हो जाता है और आग फायर लाइन तक पहुंचकर अपने आप बुझ जाती है। अगर आग ऐसी जगह लगी हो जहां वाहन पहुंच सकते हैं, तो वहां पानी की मदद से भी आग पर काबू पाया जाता है। इसके अलावा कई बार हरी टहनियों की मदद से भी आग की लपटों को दबाकर बुझाया जाता है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंगलों के कई स्थानों पर फायर वॉचर तैनात किए गए हैं, जो लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि कोई व्यक्ति जंगल में आग न लगा सके। जानकारों के अनुसार वीटीआर के जंगल जैव विविधता से भरपूर हैं, जहां कई प्रकार के दुर्लभ वन्यजीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं। हालांकि इंधन, चारा और लकड़ी की बढ़ती मांग तथा वनों के संरक्षण के अपर्याप्त उपायों के कारण इन पर खतरा भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जंगलों को आग से बचाना वन विभाग के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।

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