

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:-थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत के बाढ़ प्रभावित चार गांवों के लोगों के लिए आखिरकार उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। वर्षों से अंधेरे में जीवन गुजार रहे झंडू टोला, बिन टोली, कान्ही टोला और चकदहवा गांव में अब बिजली पहुंचने की तैयारी शुरू हो गई है। गांव के पास बिजली के खंभे गिरते देख ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी है। उन्हें उम्मीद है कि अब दशकों से चला आ रहा अंधेरा जल्द ही दूर हो जाएगा।
करीब दो हजार से अधिक आबादी वाले इन गांवों के लोग पिछले पांच दशकों से बिजली, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां रहने वाले दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग आज भी मोमबत्ती और लालटेन की रोशनी में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने के कारण शाम होते ही गांव में सन्नाटा छा जाता है और लोग सूरज ढलने से पहले ही अपने काम निपटा लेते हैं।
ग्रामीण बसंत बिन, राजूराम, हिकायत राम और पूर्व बीडीसी गुलाब अंसारी ने बताया कि वर्षों से बिजली के लिए प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन अब जाकर उम्मीद जगी है। गांव के पास बिजली के खंभे आते देख लोगों को लगने लगा है कि अब उनके जीवन में भी रोशनी आएगी। उन्होंने कहा कि बिजली नहीं रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा के काम तक काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। गर्मी के दिनों में तेज गर्मी के कारण छोटे-छोटे बच्चों को लेकर घर से बाहर सोना पड़ता था। इन गांवों की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ भी रही है। हर साल जून से सितंबर तक गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने पर ये गांव बाढ़ और कटाव की चपेट में आ जाते हैं। इस दौरान गांवों का संपर्क बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग और आसपास के बाजारों से पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। ग्रामीणों को चार महीने तक ऊंचे स्थानों या घरों की छत पर शरण लेकर रहना पड़ता है और मोमबत्ती के सहारे रातें काटनी पड़ती हैं। कुछ लोगों ने सोलर लाइट का सहारा लेकर अंधेरे को दूर करने की कोशिश की, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह भी आसान नहीं था। हालांकि बिजली के खंभे लगाए जाने की खबर से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है, लेकिन उन्हें वन विभाग के संभावित विरोध का भी डर सता रहा है। गंडक नदी के किनारे बसे झंडू टोला और कान्ही टोला के ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार वन विभाग के कारण बिजली और सड़क की योजनाएं अटक चुकी हैं। पूर्व बीडीसी गुलाब अंसारी ने बताया कि वन विभाग के प्रतिरोध के कारण ही पांच दशकों से ये गांव बिजली और सड़क से वंचित हैं। उन्हें आशंका है कि खंभे तो लग जाएंगे, लेकिन बिजली आपूर्ति के समय फिर कोई अड़चन न आ जाए। इस समस्या को लेकर ग्रामीण स्थानीय विधायक और सांसद से भी मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं।
वहीं विद्युत शक्ति गृह के कार्यपालक अभियंता आलोक अमृतांशु ने बताया कि तिलहन, दलहन और गेहूं की फसल की कटाई पूरी होने के बाद बिजली के खंभे लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो जल्द ही इन गांवों में भी बिजली की रोशनी जगमगाएगी।










