

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) इन दिनों पर्यटकों के लिए रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। जंगल सफारी के दौरान बीच जंगल में गैंडे की चहलकदमी का दुर्लभ दृश्य देखकर पर्यटक आनंदित हो उठे। सोमवार को उत्तर प्रदेश के जौनपुर से आए पर्यटकों ने मोटर अड्डा जंगल क्षेत्र में झाड़ियों के बीच जुगाली करते हुए ‘आर-फाइव’ नामक गैंडे को देखा, जिसका वीडियो और तस्वीरें उन्होंने साझा कीं। इस अद्भुत दृश्य को देखकर पर्यटकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जानकारी के अनुसार, जौनपुर से आए शुक्ला परिवार के सदस्य महेंद्र किशोर शुक्ला, अभिनव शुक्ला, आरती शुक्ला और मानवेंद्र कुमार शुक्ला जंगल सफारी के दौरान मोटर अड्डा क्षेत्र से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर झाड़ियों के बीच आराम से जुगाली करते गैंडे पर पड़ी। पर्यटकों ने तुरंत इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया। बाद में उन्होंने इसकी तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि इस तरह खुले जंगल में गैंडे को देखना उनके लिए जीवन का यादगार अनुभव बन गया। पर्यटकों ने बताया कि वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण किसी भी बड़े पर्यटन स्थल से कम नहीं है। उनका कहना था कि “हमें अब कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं लगती। पड़ोसी राज्य बिहार का वाल्मीकिनगर गोवा और कश्मीर से कम नहीं है। यहां आने के बाद मन को सुकून और आत्मा को शांति मिली है। जंगल के अंदर हिरणों की उछल-कूद, पक्षियों की चहचहाहट और हरियाली प्रकृति की अद्भुत सुंदरता को जीवंत कर देती है। साथ ही जंगल के बीच स्थित पौराणिक मंदिरों में दर्शन कर वे खुद को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। वन विभाग के अनुसार वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध क्षेत्र है। यहां 400 से अधिक गौर, 60 से अधिक बाघ और 130 से अधिक तेंदुए पाए जाते हैं। इसके अलावा नेपाल के जंगलों से आने-जाने वाले गैंडे भी इस क्षेत्र में देखे जाते हैं। बताया जाता है कि वीटीआर में दो गैंडे विचरण करते हैं, जिनमें एक नर और एक मादा है। इनमें से एक को विभाग द्वारा “आर-फाइव” नाम दिया गया है। दोनों का अधिवास अलग-अलग क्षेत्रों में माना जाता है। नर गैंडा प्रायः पूर्वी छोर की ओर घूमता दिखाई देता है, जबकि मादा का अधिवास बिहार के जंगलों में बताया जाता है। वन विभाग के अनुसार नर और मादा दोनों का यहां मौजूद होना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से शुभ संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि वीटीआर का जंगल बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट माना जाता है। यहां पर्याप्त जल स्रोत और दलदली जमीन मौजूद है, जो गैंडों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। यही कारण है कि नेपाल के जंगलों से आए गैंडे यहां आराम से विचरण करते देखे जाते हैं। इस संबंध में वाल्मीकिनगर के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा खुली होने के कारण दोनों देशों के जंगलों के बीच वन्यजीवों का आवागमन स्वाभाविक है। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी भी की जा रही है। हालांकि पर्यटकों ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए कुछ बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता भी जताई। जौनपुर से आए महेंद्र किशोर शुक्ला ने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सुंदरता अद्भुत है, लेकिन यहां पेयजल और जगह-जगह सामुदायिक शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि यदि इन सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए तो आने वाले समय में वाल्मीकिनगर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।










