आग की लपटों पर लगेगी लगाम।

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में अगलगी पर रोकथाम को लेकर वन विभाग की पुख्ता तैयारी

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- गर्मी के दस्तक देते ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगलों में अगलगी की आशंका बढ़ जाती है। हर साल आग की घटनाओं से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचता है, वहीं वन्यजीवों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए वीटीआर प्रशासन ने इस बार पहले से ही व्यापक और पुख्ता तैयारी की योजना बनाई है। वीटीआर प्रशासन के अनुसार, जंगल को आग से सुरक्षित रखने के लिए सभी आठ रेंजों में 15 फरवरी से फायर लाइन तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। प्रत्येक रेंज में फायर वॉच स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जहां से पूरे वन क्षेत्र की सतत निगरानी की जाएगी। इसके लिए 100 से अधिक प्रशिक्षित फायर वॉचरों को तैनात किया जाएगा, जो दिन-रात जंगल पर नजर रखेंगे और आग की किसी भी आशंका की तुरंत सूचना देंगे। वन विभाग ने अगलगी की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए एक विस्तृत फायर कंट्रोल प्लान भी तैयार किया है। पतझड़ की शुरुआत के साथ ही जंगलों में सूखे पत्तों की परत बिछ जाती है, जिससे आग तेजी से फैलने का खतरा बना रहता है। खासकर फरवरी और मार्च के महीनों में तेज हवाओं के कारण आग पर काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जंगल के भीतर फायर लाइन बनाई जाएगी। फायर लाइन के तहत जंगल में चार मीटर चौड़ी पट्टी तैयार की जाती है, जहां दोनों ओर मौजूद सूखी घास, झाड़-झंखाड़ और गिरे हुए पत्तों को नियंत्रित तरीके से जला दिया जाता है। इससे यदि किसी स्थान पर आग लग भी जाए तो वह आगे फैल नहीं पाती। इसके साथ ही जंगल के वॉटर होल्स में पर्याप्त मात्रा में पानी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर आग बुझाने में कोई परेशानी न हो। आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। सेटेलाइट के माध्यम से जंगल की निगरानी की जा रही है, जिससे आग लगने की सूचना तत्काल मिल सके। देहरादून स्थित कंट्रोल सेंटर से आग की लोकेशन की जानकारी मिलते ही स्थानीय टीम को अलर्ट कर दिया जाएगा और रेस्क्यू व कंट्रोल ऑपरेशन शुरू कर दिया जाएगा। वन विभाग लोगों की भागीदारी को भी बेहद अहम मान रहा है। जंगल को आग से बचाने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में विचार गोष्ठी, चित्रकला प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि बच्चों और ग्रामीणों को जंगल की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। ग्रामीणों से अपील की जाएगी कि वे जंगल में आग लगने की किसी भी घटना की तुरंत सूचना विभाग को दें। इस संबंध में वीटीआर के सीएफ नेशामणि ने बताया कि आग से बचाव के लिए फायर लाइन कटिंग का कार्य 15 फरवरी से पहले ही शुरू कर दिया जाएगा। जंगल को कई ब्लॉकों में विभाजित कर चौड़ी पट्टियों में सूखी पत्तियों को एकत्र कर जलाया जाएगा, ताकि आग फैलने की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि समय रहते की गई यह तैयारी जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगी। वन विभाग की इस सक्रिय पहल से उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष वीटीआर को अगलगी की घटनाओं से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।

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