जीकेसी सेवा-मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने राजकीय नेत्रहीन विद्यालय कदमकुंआ में मनाया होली का त्योहार।

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बिहार/पटना। 03 मार्च विश्वस्तरीय कायस्थ संगठन ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) सेवा-मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने राजकीय नेत्रहीन विद्यालय कदमकुंआ में बच्चों के बीच होली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया।जीकेसी सेवा-मानवाधिकार प्रकोष्ठ राजधानी पटना के राजकीय नेत्रहीन विद्यालय कदमकुंआ के बच्चों के बीच रंग, अबीर, टोपी, मुखौटा पिचकारी और गिफ्ट दिये जिसे पाकर बच्चों के चेहरे खिलखिला उठे। सभी लोगों ने एक-दूसरे को रंग-अबीर लगाकर होली की बधाई दी। कार्यक्रम का संयोजन जीकेसी सेवा- मानवाधिकार प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय प्रभारी सह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. नम्रता आनंद ने किया। इस अवसर पर जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा,होली का त्योहार एकता का संदेश देता है। होली मिलन समारोह एकता का प्रतीक है। यह त्योहार गिले-शिकवे को दूर करने का है।होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। प्यार भरे रंगों से सजा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन खोलकर भाई-चारे का संदेश देता है।जरूरतमंद लोगों के बीच त्योहार की खुशियां बांटकर सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जा सकता है। होली खुशहाली और जीवन में रंग भरने का त्यौहार है। उन्होंने सभी लोगों को आपसी भाईचारा के साथ होली का का पर्व मनाने की अपील की। इस अवसर पर डा. नम्रता आनंद ने कहा, ज़रूरत रंगों की नहीं प्रकाश की होती है, जिसमें रंगों का अस्तित्व होता है, जिससे रंगों की पहचान होती है।जीकेसी सेवा-मानवाधिकार प्रकोष्ठ सेवा-समर्पण की भावना को संजोये हुये है। होली का त्योहार खुशियां बांटने का है। हमारी कोशिश है कि हम विद्यालय के बच्चों के बीच जाकर उनकी जिंदगी में खुशनुमा रंग भरें और उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेर सके। होली सिर्फ रंगों का ही त्यौहार नहीं है बल्कि यह सामाजिक समरसता एवं आपसी सौहार्द का प्रतीक है। इन बच्चों के बीच आकर होली मनाने के बाद इस महान पर्व की सार्थकता सही साबित होती है। इस अवसर पर जीकेसी बिहार-झारखंड के सह प्रभारी प्रेम कुमार, राष्ट्रीय सचिव दीप श्रेष्ठ, राष्ट्रीय सचिव राजेश सिन्हा संजू, कला-संस्कृति प्रकोष्ठ बिहार के अध्यक्ष दिवाकर कुमार वर्मा, आईटी सेल बिहार के अध्यक्ष आशुतोष ब्रजेश, कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय अमबष्ठ, कला- संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव प्रवीण कुमार बादल, दिवाकर कुमार, प्रसून श्रीवास्तव, अभिषेक कुमार, रेणु सिन्हा, राजकुमार स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षक और छात्र समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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