

पिता का साया बचपन में उठा, भाइयों ने मजदूरी कर पढ़ाया, आत्मविश्वास, मेहनत और लगन से पाई बड़ी सफलता।
बेतिया/वाल्मीकिनगर: कहा जाता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, इरादे मजबूत हों और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सफलता एक दिन जरूर मिलती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के चंपापुर गोनौली पंचायत अंतर्गत गोनौली गांव की बेटी निरकला कुमारी ने। सीमित संसाधनों और आर्थिक अभावों के बीच पली-बढ़ी निरकला ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 70वीं रैंक प्राप्त की है। इस उपलब्धि के साथ उनका चयन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पद के लिए हुआ है। उनकी सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।
निरकला कुमारी स्वर्गीय बलि गुरु की पुत्री हैं। बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और जीवन में कई कठिन चुनौतियां सामने थीं। लेकिन निरकला ने कभी भी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने संघर्षों को अपनी ताकत बनाया और लगातार मेहनत करते हुए अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। निरकला अपने दो भाइयों कपिलदेव गुरु और धनेश्वर गुरु की सबसे छोटी बहन हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी भाइयों और मां बिकनी देवी के कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद दोनों भाइयों ने खेती और मजदूरी कर बहन की पढ़ाई जारी रखी। परिवार के सदस्यों ने अपनी जरूरतों से समझौता किया, लेकिन निरकला की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। मां ने भी हर कठिन परिस्थिति में बेटी का मनोबल बढ़ाया और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहीं। निरकला की सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किसी बड़े संस्थान या महंगे संसाधनों का सहारा नहीं लिया। उन्होंने स्वयं कोचिंग पढ़ाकर अपनी शिक्षा का खर्च उठाया और आत्मनिर्भर बनकर तैयारी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। आज भी उनके परिवार के पास रहने के लिए कोई बेहतर मकान नहीं है, लेकिन शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना लाखों युवा देखते हैं। बीडीओ पद पर चयन की खबर जैसे ही गोनौली गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों का उनके घर पर तांता लग गया। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निरकला की इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया। लोगों का कहना है कि उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी को अपनी असफलता का कारण मानते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि निरकला ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने टिक नहीं सकतीं। गोनौली की इस बेटी ने न केवल अपने परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा की मिसाल भी कायम की है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।










