वीटीआर के इको सेंसिटिव जोन में अवैध खनन का खेल, वन्यजीवों और पर्यावरण पर गहराया खतरा।

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पीपराकुट्टी, कोतराहा, ठाढ़ी और हवाई अड्डा क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रही बालू–पत्थर की निकासी

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के इको सेंसिटिव जोन से सटे क्षेत्रों में इन दिनों अवैध बालू और पत्थर खनन का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। पीपराकुट्टी, कोतराहा, ठाढ़ी और हवाई अड्डा क्षेत्र में खनन माफिया खुलेआम बालू एवं पत्थरों की निकासी कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह अवैध कारोबार वन विभाग और प्रशासन की नजरों के सामने लंबे समय से जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। लगातार हो रहे खनन का असर अब वन्यजीवों, नदियों और पर्यावरण पर साफ दिखाई देने लगा है। वाल्मीकिनगर वन प्रमंडल-2 के सेफ्टी जोन अंतर्गत आने वाले इन क्षेत्रों में ट्रैक्टर के जरिए दिन-रात बालू और पत्थरों की ढुलाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से यह अवैध धंधा जारी है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी रफ्तार और बढ़ गई है। खनन माफियाओं ने कई स्थानों पर अपना वर्चस्व कायम कर लिया है, जिसके कारण सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बालू निकासी से नदियों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। नदी के आस पास अत्यधिक उत्खनन के कारण घड़ियाल, मगरमच्छ और अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा, भारी मशीनों और वाहनों के शोर से वन्यजीवों का स्वच्छंद विचरण प्रभावित हो रहा है। जंगलों के प्राकृतिक गलियारे टूटने से वन्यजीवों के व्यवहार, भोजन और प्रजनन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


खनन गतिविधियों के कारण नदियों का पानी भी मटमैला होता जा रहा है, जिससे जलीय जीवन संकट में पड़ गया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस तरह का अनियंत्रित उत्खनन लंबे समय में पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है। वहीं खनन के बहाने असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ने से वन्यजीवों के अवैध शिकार की आशंका भी बढ़ गई है। गौरतलब है कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2017 में वाल्मीकि वन अभ्यारण्य, वाल्मीकि व्याघ्र उद्यान और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया था। इसके तहत संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 0 से 9 किलोमीटर तक नए उत्खनन कार्यों पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद 11 जनवरी 2018 को वन विभाग ने अधिसूचना जारी कर इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन कार्यों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा-19 के उल्लंघन के बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में वीटीआर क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीवों के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इस मामले में डीएफओ विकास अहलावत ने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के सेफ्टी जोन में खनन माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध खनन की जांच की जाएगी। जांच के बाद जिला खनन पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाएगी तथा खनन कार्य में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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