वीटीआर में देखें ‘लोन बूल’ का असली रोमांच, अकेले दम पर जंगल का बादशाह, पर्यटक हुए मंत्रमुग्ध।

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बगहा/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) अपनी समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ वन्यजीवों के कारण देश-विदेश में तेजी से पहचान बना रहा है। यहां का घना जंगल न केवल वन्यजीवों के सुरक्षित आवास के रूप में जाना जाता है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। विभिन्न प्रजाति के शाकाहारी और मांसाहारी जीवों की मौजूदगी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के साथ-साथ पर्यटकों को रोमांचक अनुभव भी प्रदान करती है। खासकर गर्मी के मौसम में, जब लोग प्राकृतिक ठंडक और सुकून की तलाश में होते हैं, तब बड़ी संख्या में पर्यटक परिवार सहित वाल्मीकिनगर की ओर रुख करते हैं।
इसी क्रम में रविवार को उत्तर प्रदेश के कप्तानगंज से आए पर्यटकों के लिए जंगल सफारी एक यादगार अनुभव बन गया। मोटर अड्डा जंगल क्षेत्र में सफारी के दौरान अचानक उन्हें ‘लोन बूल’ का दीदार हुआ। यह दृश्य देखते ही पर्यटक हैरान रह गए। विशालकाय शरीर, मजबूत सींग और शांत लेकिन भीतर से आक्रामक स्वभाव वाले इस जंगली सांड को देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। कई लोगों ने इस दुर्लभ क्षण को अपने कैमरों में कैद कर लिया। वन विशेषज्ञों के अनुसार ‘लोन बूल’ ऐसे नर सांड होते हैं, जो अपने झुंड से अलग होकर अकेले या छोटे बैचलर समूह में रहना पसंद करते हैं। सामान्यतः ये जंगल के गहरे हिस्सों में रहते हैं और बहुत कम ही खुले में नजर आते हैं। इनका शरीर भारी-भरकम और ताकतवर होता है, जिससे ये अन्य वन्यजीवों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली माने जाते हैं। कहा जाता है कि हाथी को छोड़कर जंगल का कोई भी जीव इनके सामने आने की हिम्मत नहीं करता। इनका व्यवहार भी अन्य वन्यजीवों से बिल्कुल अलग होता है। ‘लोन बूल’ अपने क्षेत्र को लेकर बेहद सजग और संवेदनशील होते हैं। वे अपने इलाके को सुरक्षित रखने के लिए हर समय सतर्क रहते हैं। प्रजनन काल के दौरान इनकी आक्रामकता और भी बढ़ जाती है, जिससे जंगल के अन्य छोटे-बड़े जीव इनसे दूरी बनाकर चलते हैं। इनकी उपस्थिति मात्र से ही अन्य जानवर अपना रास्ता बदल लेते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ सौरभ वर्मा बताते हैं कि ‘लोन बूल’ की एक खास आदत होती है—वे अपने सींगों को पेड़ों पर रगड़कर गंध छोड़ते हैं। यह गंध उनके क्षेत्र की पहचान होती है और अन्य वन्यजीवों को उस इलाके से दूर रहने का संकेत देती है। उनकी ‘मस्त’ अवस्था, यानी हार्मोनल बदलाव, उन्हें और अधिक शक्तिशाली और आक्रामक बनाती है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में ऐसे ‘लोन बूल’ की संख्या सौ से अधिक बताई जाती है, लेकिन इनका दीदार पर्यटकों को बहुत कम ही हो पाता है। यही कारण है कि जब भी किसी पर्यटक को इनका सामना होता है, वह पल बेहद खास और जीवनभर के लिए यादगार बन जाता है। वीटीआर में इस तरह के दुर्लभ अनुभव न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता भी बढ़ा रहे हैं।

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