

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,
बेतिया/वाल्मीकि नगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध कालेश्वर झूला पुल को तकनीकी कारणों से अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है। पुल के एक सपोर्ट पिलर के झुक जाने की सूचना के बाद वन विभाग ने एहतियातन यह कदम उठाया है। इस फैसले से यहां घूमने आए पर्यटकों में निराशा देखी जा रही है। रेंजर सत्यम कुमार के अनुसार, पुल का एक हिस्सा असंतुलित हो गया है, जिससे इसके सुरक्षित उपयोग पर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि जब तक पुल की पूरी तरह मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं हो जाती, तब तक इसे पर्यटक के लिए बंद रखा जाएगा। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी है और जल्द सुधार कार्य शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह झूला पुल नारायणी नदी के तट पर घने जंगलों के बीच स्थित है और लगभग 600 फीट लंबा है। होटल वाल्मीकि विहार के पास पूर्व दिशा में बना यह पुल पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा है। यहां से गंडक नदी का विस्तृत दृश्य, नेपाल के पहाड़ों की खूबसूरती, और मनमोहक सूर्योदय-सूर्यास्त का नजारा साफ दिखाई देता है। इस पुल की खासियत सिर्फ इसकी लंबाई ही नहीं, बल्कि इसका प्राकृतिक परिवेश भी है। गंडक नदी की शांत धारा, पक्षियों की चहचहाहट और पुल के हल्के कंपन के बीच चलने का अनुभव पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचकारी होता है। यही कारण है कि हर दिन यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते थे। झूला पुल का उपयोग धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा है। इसी मार्ग से होकर पर्यटक कालेश्वर मंदिर, जटाशंकर मंदिर, और वाल्मीकि आश्रम जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंचते हैं। जानकारी के मुताबिक, इस झूला पुल से प्रतिदिन करीब दो हजार रुपये की आमदनी होती थी, जो स्थानीय पर्यटन गतिविधियों का एक अहम हिस्सा है। ऐसे में पुल के बंद होने से स्थानीय व्यवसायों पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल पर्यटक और स्थानीय लोग पुल के जल्द मरम्मत की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि एक बार फिर इस अद्भुत स्थल का आनंद लिया जा सके।










