

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक बार फिर पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव का गवाह बना, जब जंगल सफारी के दौरान “जंगल के राजा” बंगाल टाइगर ने सामने आकर सभी को रोमांचित कर दिया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आए एक डॉक्टर परिवार के लिए यह सफर जीवन का सबसे यादगार पल बन गया, वहीं बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी। शनिवार की सुबह जंगल सफारी के दौरान मोटर अड्डा जंगल क्षेत्र के समीप पर्यटकों को बाघ के दर्शन हुए। खास बात यह रही कि बाघ कुछ देर तक खुले इलाके में विचरण करता रहा, जिससे पर्यटकों को उसका स्पष्ट और शांत स्वरूप देखने का अवसर मिला। बाघ बेहद धीमी और आत्मविश्वास भरी चाल से अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहा था, मानो वह जंगल का निरीक्षण कर रहा हो। इस दौरान सफारी में मौजूद पर्यटक अपने मोबाइल और कैमरों से इस अद्भुत क्षण को कैद करने में जुटे रहे। सफारी में शामिल गोरखपुर के डॉ. रजनीश पांडेय, उनकी पत्नी डॉ. अभिलाषा और बेटी मुक्ता ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, “हमारी दिली इच्छा थी कि बाघ का दीदार हो, और आज वह पूरी हो गई। हमारी बेटी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह अनुभव जीवनभर याद रहेगा।” परिवार ने बताया कि जंगल की हरियाली, पक्षियों की मधुर आवाज और बाघ की शाही मौजूदगी ने पूरे माहौल को रोमांच और सुकून से भर दिया।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां बाघ के अलावा तेंदुआ, भालू, गौर, सांभर और हिरण की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। आमतौर पर पर्यटकों को हिरणों के झुंड और अन्य वन्य जीव आसानी से दिखाई देते हैं, लेकिन बाघ का दर्शन बेहद दुर्लभ और खास माना जाता है। यही कारण है कि जब भी बाघ नजर आता है, वह पूरे सफारी अनुभव को अविस्मरणीय बना देता है।
वन विभाग के अनुसार, 23 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए इस पर्यटन सत्र में यह चौथा मौका है जब पर्यटकों को बाघ के दर्शन हुए हैं। इससे पहले भी विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों को बाघ दिखाई दे चुका है। लगातार हो रही टाइगर साइटिंग इस बात का संकेत है कि जंगल में बाघों की सक्रियता बढ़ी है, जो वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि इस सत्र में बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से पर्यटक वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस बार दो दर्जन से अधिक विदेशी पर्यटक भी यहां आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रिजर्व की पहचान और मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा, “विदेशी पर्यटकों के आने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होते हैं।”जंगल की घनी हरियाली, वन्य जीवों की विविधता और बाघ की दुर्लभ झलक—इन सबने मिलकर वाल्मीकिनगर को इस समय पर्यटन का हॉटस्पॉट बना दिया है। यहां आने वाला हर पर्यटक अपने साथ रोमांच, सुकून और यादगार अनुभव लेकर लौट रहा है।










