तमसा की कलकल धारा में झूमे छात्र, वाल्मीकिनगर की वादियों में उमड़ा पर्यटन उत्साह।

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बेतिया/वाल्मीकिनगर : भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इन दिनों पर्यटकों और शैक्षणिक भ्रमण पर आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों का आनंद ले रहे हैं। विशेष रूप से वाल्मीकि आश्रम पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के समीप, नेपाली क्षेत्र में स्थित वाल्मीकि आश्रम जंगल कैंप से लगभग 5 किलोमीटर दूर पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को दो पौराणिक नदियों को पार करना पड़ता है, जो यात्रा को और भी रोमांचक बना देता है। आश्रम के समीप बहने वाली तमसा नदी अपनी स्वच्छ और कलकल बहती धारा के लिए प्रसिद्ध है, जो आगे चलकर गंडक नदी में मिल जाती है। शुक्रवार को शैक्षणिक भ्रमण पर पहुंचे छात्र-छात्राओं ने तमसा नदी की शीतल जलधारा में जमकर जल क्रीड़ा की। बच्चे साफ-सुथरे पानी में खेलते हुए बेहद उत्साहित नजर आए। उनकी चंचलता और उमंग ने वहां मौजूद अन्य पर्यटकों का भी मन मोह लिया। हालांकि, अधिकांश बच्चों को यह जानकारी नहीं थी कि यही वह ऐतिहासिक नदी है, जहां महर्षि वाल्मीकि और भगवान राम के पुत्र लव-कुश स्नान कर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते थे। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सोनभद्र नदी और तमसा नदी के जल के स्पर्श मात्र से तन-मन की शुद्धि होती है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु इन नदियों के जल को छूकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। वाल्मीकि आश्रम से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित सोनभद्र नदी, गंडक में मिलती है और तीनों नदियों का संगम “त्रिवेणी संगम” के रूप में प्रसिद्ध है। सोनभद्र नदी को लेकर एक विशेष मान्यता भी प्रचलित है। कहा जाता है कि इसकी बालू में सोना पाया जाता है। भ्रमण पर आए पर्यटकों ने इस स्थल की खुलकर सराहना की। पूर्वी चंपारण के अरेराज से आए शिक्षकों ने बताया कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ जलधाराएं और शांत वातावरण मन को गहरी शांति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि “बिहार का कश्मीर” कहलाने वाला वाल्मीकिनगर वास्तव में प्रकृति का अद्भुत उपहार है। कुल मिलाकर, वाल्मीकिनगर अब सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक अनुभव का संगम बनता जा रहा है, जहां हर आगंतुक यादगार पल समेटकर लौटता है।

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