



जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- गर्मी का मौसम शुरू होते ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में जंगल की आग एक गंभीर चुनौती बन जाती है। हर वर्ष आग की घटनाओं में सैकड़ों एकड़ वन संपदा जलकर खाक हो जाती है, जिससे न केवल पेड़-पौधों को भारी नुकसान पहुंचता है बल्कि वन्यजीवों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। इसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए इस वर्ष वीटीआर प्रबंधन ने एक अहम और सख्त कदम उठाते हुए ‘जीरो फायर मिशन’ की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य गर्मी के पूरे मौसम में जंगल को आग से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। वीटीआर प्रशासन ने इस अभियान के तहत उन गांवों को विशेष रूप से चिह्नित किया है, जिनके आसपास के जंगलों में हर साल आग लगने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। अक्सर देखा गया है कि सूखे पत्तों में लगी छोटी सी आग धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर लेती है और पूरा जंगल उसकी चपेट में आ जाता है। कई मामलों में यह आग मानव लापरवाही या जानबूझकर लगाई जाती है, जिससे जंगल और वन्यजीवों को भारी क्षति होती है।
फायर वाच स्टेशन और आधुनिक संसाधनों की तैनाती
जीरो फायर मिशन को प्रभावी बनाने के लिए वीटीआर की सभी रेंजों में फायर वाच स्टेशन का निर्माण कराया गया है। इन स्टेशनों पर वनकर्मियों की नियमित तैनाती की गई है, ताकि आग की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जा सके। वीटीआर प्रशासन द्वारा खरीदे गए दमकल वाहन आग लगने की स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचकर उसे नियंत्रित करेंगे। जंगल के भीतर आग पर काबू पाने के लिए छोटे दमकल वाहनों के पहुंच मार्ग भी तैयार किए जा रहे हैं। प्रत्येक रेंज में करीब 15 फायर वाचरों की तैनाती की गई है। इसके अलावा सभी रेंजों में चार-चार ब्लोअर मशीन उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें से दो गटोर युक्त हैं। इन मशीनों से तेज हवा के साथ पानी भी छोड़ा जा सकता है, जिससे पेड़ों की ऊंचाई पर लगी आग बुझाने में काफी मदद मिलती है। आग की सूचना सैटेलाइट के माध्यम से भी मिल जाती है, जिससे शुरुआती समय में ही आग पर काबू पाया जा सके। 890 वर्ग किलोमीटर में फैला संवेदनशील क्षेत्र बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा से सटा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का इकलौता टाइगर रिजर्व है, जहां हर साल दर्जनों बार आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। आग लगने से न केवल जंगल धू-धू कर जलता है, बल्कि वन्यजीवों में भी अफरा-तफरी मच जाती है। प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार का कहना है कि कई बार असामाजिक तत्व जानबूझकर बेंत के जंगलों में आग लगाते हैं, ताकि जलने के बाद बेंत की तस्करी आसानी से की जा सके। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग से जीव-जंतुओं, वन संपदा और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है।
15 फरवरी से 15 जून तक रहता है अग्नि सीजन
इस संबंध में वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि वीटीआर में अग्नि सीजन 15 फरवरी से शुरू होकर 15 जून तक चलता है। इस दौरान आग से प्राकृतिक पौधों के नष्ट होने के साथ-साथ वृक्षों की लकड़ी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इसलिए वनों को आग से बचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आग से सुरक्षा के लिए सभी रेंजों में अग्नि रेखाओं की कटाई, सफाई और सूखे पत्तों का नियंत्रित दहन किया जाएगा। साथ ही, सभी वनकर्मियों को अग्नि सुरक्षा से जुड़े आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। वीटीआर में शुरू किया गया जीरो फायर मिशन न केवल जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा। वाल्मीकिनगर रेंजर के अनुसार गर्मी के मौसम में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। वनवर्ती गांव में जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों को आग न लगाने की सलाह दी जा रही है। बैठकों के माध्यम से वनाग्नि को रोकने में वन विभाग और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। ‘जंगल बचाओ, जीवन बचाओ’ की थीम पर जागरूकता फैलाई जा रही है। वही ग्रामीणों को कहीं भी आग लगने पर तुरंत वन विभाग या नजदीकी वनकर्मी को सूचित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।










