“बिहार का कश्मीर” बना वाल्मीकिनगर

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प्रशिक्षण उपरांत बिहार फायर सर्विस की 50 सदस्यीय टीम ने किया जंगल सफारी व धार्मिक स्थलों का दर्शन

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,

बेतिया/वाल्मीकिनगर:-वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की हरियाली, पहाड़, जंगल और नदियों का अद्भुत संगम एक बार फिर आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर गया। शनिवार को बिपार्ड (बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान) से एक माह का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बिहार भ्रमण पर निकली बिहार फायर सर्विस की 50 सदस्यीय टीम वैशाली होते हुए वाल्मीकिनगर पहुंची। इस दल में लगभग 20 अविवाहित महिला फायरफाइटर भी शामिल थीं। टीम ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का आनंद लिया और इसके बाद ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा- अर्चना की। वाल्मीकिनगर, जो इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटा हुआ है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। जल, जंगल और पहाड़ का यह अनोखा सम्मिश्रण बिहार के उत्तरी छोर को एक विशेष पहचान देता है। जंगल सफारी के दौरान बिहार फायर सर्विस के जवानों ने बाघ, हिरण, विभिन्न पक्षी प्रजातियों सहित जंगल की समृद्ध वन संपदा को नजदीक से देखा। उनके साथ मौजूद नेचर गाइड की टीम ने वन्यजीवों और पेड़-पौधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे उनका अनुभव और भी समृद्ध हुआ। टीम का नेतृत्व कर रहे फायरफाइटर विकास कुमार ने बताया कि हम सभी ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बारे में सिर्फ सुना था, लेकिन यहां आकर महसूस हुआ कि यह क्षेत्र वास्तव में“बिहार का कश्मीर” है। उन्होंने कहा कि यहां की शांति, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य मन को सुकून देता है। जंगल सफारी के बाद टीम ने लव-कुश की जन्मस्थली वाल्मीकि आश्रम पहुंचकर माता सीता के पाताल गमन मार्ग पर माथा टेक पूजा-अर्चना की। अपने अनुभव साझा करते हुए फायरफाइटर अनिल कुमार, अंजली कुमारी और पूजा कुमारी ने कहा कि नेपाल सीमा में होने के कारण वाल्मीकि आश्रम आज भी उपेक्षा का शिकार है। यदि बिहार सरकार और भारत सरकार मिलकर इस धार्मिक स्थल का विकास करें, तो इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर लोग कश्मीर जाना भी भूल जाएंगे।
इधर, वाल्मीकिनगर स्थित इको पार्क की बदली हुई खूबसूरती ने भी टीम के सदस्यों को खूब आकर्षित किया। फायरफाइटर मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार के खर्चे पर तो हमने भ्रमण कर लिया, लेकिन अब हम अपने बच्चों को भी इस सुंदर स्थल का दर्शन कराने जरूर आएंगे। उन्होंने गर्मी की छुट्टियों में परिवार के साथ दोबारा वाल्मीकिनगर आने की इच्छा जताई। भ्रमण के दौरान बिहार फायर सर्विस के सदस्यों ने वाल्मीकिनगर रेंजर से मुलाकात कर वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन की सराहना की। कुल मिलाकर यह भ्रमण न सिर्फ प्रशिक्षण के बाद एक ताजगी भरा अनुभव रहा, बल्कि वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक और धार्मिक महत्ता को करीब से समझने का अवसर भी मिला।

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