सैलानियों को लुभा रही वीटीआर की हसीन वादियां।

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जंगल सफारी और रोमांच की चाहत में दौड़े आ रहे पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है

जिला व्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- गुलाबी ठंड की शुरूआत होते ही वीटीआर की सुरम्य वादियां सैलानियों को लुभा रही हैं। यहां सैलानियों के आने सिलसिला लगातार जारी है। नेपाल की पहाड़ियों से निकलकर वाल्मीकिनगर के मैदानी इलाके में कल-कल कर बहने वाली गंडक नदी में फिलहाल पानी के अभाव के कारण नौका विहार बंद है। पक्षियों का कलरव, खुले जंगल में भ्रमण के दौरान बाघ व अन्य वन्य जीवों का दीदार सैलानियों के लिए अत्यन्त रोमांचकारी दृश्य होता है।इंडो-नेपाल बार्डर पर स्थित वीटीआर में बाघों की दहाड़, जंगल में वृक्षों की शाखाओं पर आराम फर्माते तेंदुए, कुलाचें भरते हिरणों का झुण्ड, लम्बे थूथन से वन भूमि खोदते जंगली सुअर, वृक्षों की डालों पर झूलते बन्दर व लंगूरों का अवलोकन करने से नैसर्गिक अनुभूति होती है। शीतकाल में प्रवासी तथा अप्रवासी जलीय पक्षियों का आगमन गंडक बराज के जलाशय में होने से वीटीआर की सुन्दरता में इन दिनों चार चाँद लग गए हैं। लगभग 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जैव विविधता एवं बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध इस वीटीआर को वर्ष 1994 मेंं इसे प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया था। इन दिनों वाल्मीकिनगर का मौसम सुहावना है। वाल्मीकि नगर से हिमालय पर्वत श्रृंखला का दीदार पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर रही है। आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या में और अधिक इजाफा होने की उम्मीद है।

गंडक नदी की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण, ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक स्थलों से अपने आप को समेटे वाल्मीकि नगर हर वक्त पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। यहां न केवल पर्यटकों को हर मोड़ पर प्रकृति की प्राकृतिक रचना के दीदार होते हैं।सफारी रूट 30 किलोमीटर लंबा रास्ता घने जंगलों से गुजरता है। इसमें पर्यटकों को करीब दो घंटे का वक्त लगता है। इस रास्ते पर बाघ, तेन्दुआ, भालू ज्यादा दिखाई देता है। इस मार्ग पर पर्यटक प्राकृतिक नजारे के साथ ही जंगली जानवरों काे देख सकते हैं। पर्यटक इस मार्ग से जटाशंकर चेक नाका से प्रवेश कर गोनोली चेक नाका होते हुए दरूआवारी नाका, मोटर अड्डा ग्रासलैंड के रास्ते, भालू थापा पार कर, जटाशंकर धाम मंदिर होते हुए वापस जंगल कैम्प पहुंचता है। पर्यटकों को टाइगर रिजर्व का ईको पर्यटन आकर्षित कर रहा है। पर्यटक जंगल सफारी से सैर कर जंगल की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव देखकर लुफ्त उठा रहे हैं।

वीटीआर में धीरे-धीरे पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। ठंड के मौसम में स्थानीय और बाहरी पर्यटकों का तांता लग रहा है। प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक गंडक बराज को देखने आते हैं। गंडक नदी केचमेंट क्षेत्र में सैकड़ों मगरमच्छ एवं घड़ियालो का डेरा है। सर्दीयो के मौसम में गंडक नदी के तट पर दर्जनों मगरमच्छ एवं विदेशी मेहमान परिन्दो को देखा जा सकता है। यहां की प्राकृतिक सौंदर्य एवं जैव विविधता अतुलनीय है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में इन दिनों पर्यटन और मस्ती के लिए शानदार मौसम है। गुलाबी ठंड के बीच कोहरे में डूबी सुबह देश-विदेश के सैलानियों को अपनी ओर खींच रही है। आवासन और भोजन की बेहतर व्यवस्था से पर्यटकों को और सहुलियत हो रही है। जंगल सफारी और रोमांच की चाहत में दौड़े आ रहे पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गंडक नदी का किनारा, गंडक बराज वीटीआर की रौनक में और चार चांद लगाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश एवं नेपाल की आबोहवा में महफूज रहने वाला हर वो वन्य जीव वीटीआर में मौजूद है जिनको एक नजर देखने के लिए सैलानी लालायित रहते हैं। विश्राम के साथ वीटीआर की सैर से पर्यटकों को जिंदगी के तनाव से मुक्ति मिल जाती है। यही वजह है कि वन्यजीव और जंगलों से प्रेम करने वाले सैलानी इस मौसम में वीटीआर की ओर खींचे चले आ रहे हैं। दीपावली एवं छठ पर्व के समापन के पश्चात यहां पर्यटकों की अच्छी संख्या दिखाई दे रही है।नवंबर के अंतिम हफ्ते में रातें जरूर गुलाबी सर्द का एहसास करा रही हैं। मगर, दिन का तापमान सामान्य रहने से पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं हो रही। सुबह देर से हो रही है और शाम वक्त से कुछ पहले। पर्यटक नेचर गाइडों के साथ ईको पार्क समेत जंगल के अन्दरूनी इलाके में घूमने जा रहे हैं। वीटीआर के घने जंगल सूरज की रोशनी के लिए और इंतजार करा रहे हैं। पर्यटकों की सुविधा को साथ मौजूद रहने वाले नेचर गाइड वीटीआर के रोमांच और नई-पुरानी कहानियों से सबको रूबरू करा रहे हैं। वीटीआर में आने वाले ज्यादातर पर्यटक बाघ का दीदार करना चाहते हैं। लेकिन अधिकांश बाघों को देख नहीं पाते। सर्दियों के मौसम में वीटीआर के जानवरों की लाइफ स्टाइल भी बदल गई है। घने जंगलों के बीच रह रहे जानवर सर्दियों की धूप खाने बाहर निकल रहे हैं। वीटीआर से सटे गंडक नदी के जलाशय के बाहर मगरमच्छ आराम फरमाते हुए देखे जा सकते हैं। इसी जलाशय के आसपास बारहसिंघों के झुंड भी निकल पड़ते हैं और उसके शिकार के लिए बाघ अक्सर आते हैं। सर्दियां आते ही जानवर अपने लिए गर्म आशियाना तलाश करने में दिन भर भटकते हैं। रात के वक्त इनको छेड़ना खतरनाक हो सकता है। इसलिए आमतौर पर जंगल सफारी सिर्फ दिन के उजाले में ही की जाती है। जंगल सफारी के शुभारंभ के बाद पर्यटकों का वाल्मीकिनगर के प्रति आकर्षण और बढ़ गया है।

वीटीआर में जीवों का संसार

वीटीआर में बाघ, तेन्दुआ, भालू , हाथी, चीतल, सांभर, बारहसिंहा हॉग डियर,गैंडा, लकडबग्घा,वाकिग डियर, सहित दर्जनों दुर्लभ वन्य प्राणी मौजूद है ।

पार्क का भूगोल

करीब 900 वर्ग किमी में फैले वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल की सीमा उत्तर प्रदेश के सोहगीवरवा वन्य अभ्यारण्य एवं नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से लगती है

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