

बेतिया/मझौलिया। शादी की खुशियां उस वक्त चीख-पुकार में बदल गईं, जब दूल्हा सात फेरे लेने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गया। मझौलिया थाना क्षेत्र के सरिसवा पंचायत के वार्ड संख्या-6 स्थित भरवलिया गांव की यह हृदयविदारक घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर परिवार अपने जवान बेटे के निधन से टूट गया, तो दूसरी ओर डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद भी परिजन ओझा के सहारे चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे रहे। जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय जगदीश ठाकुर के सबसे छोटे पुत्र शक्तिनाथ शर्मा की शादी पूर्वी चंपारण के रामगढ़वा स्थित सीताराम मंदिर में तय थी। बारात पूरे उत्साह और बैंड-बाजे के साथ मंदिर पहुंची थी। शादी की रस्में शुरू होने ही वाली थीं कि अचानक शक्तिनाथ के सीने और पेट में तेज दर्द उठा। परिजन तत्काल उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दुखद खबर के बाद शादी की सभी तैयारियां पलभर में मातम में बदल गईं। हालांकि, परिजन इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर सके। वे शव को गांव लेकर आए और ओझा को बुलाकर झाड़-फूंक कराने लगे। देखते ही देखते यह खबर आसपास के गांवों में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग भरवलिया पहुंचने लगे। गांव में देर तक अंधविश्वास और चमत्कार की उम्मीद को लेकर चर्चाएं होती रहीं।
बताया जाता है कि शक्तिनाथ शर्मा तीन भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे थे। तीन वर्ष पहले उनकी मां लालसा देवी और लगभग दस वर्ष पूर्व पिता जगदीश ठाकुर का निधन हो चुका था। अब जिस घर से बारात विदा हुई थी, वहीं मातम का सन्नाटा पसरा है। यह घटना न केवल एक परिवार की असहनीय त्रासदी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और वैज्ञानिक सोच के बावजूद समाज के कई हिस्सों में अंधविश्वास आज भी गहरी पकड़ बनाए हुए है ।










