आदिवासी संस्कृति की खुशबू से महका वाल्मीकिनगर जंगल कैंप, लोक नृत्य-संगीत के बीच वनभोज गृह का भव्य उद्घाटन।

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पर्यटकों को मिलेगा पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकिनगर जंगल कैंप में सोमवार को आदिवासी संस्कृति और पर्यटन का अनोखा संगम देखने को मिला। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व वन प्रमंडल-2 अंतर्गत नवनिर्मित आधुनिक वनभोज गृह का उद्घाटन पारंपरिक रीति-रिवाजों और आदिवासी लोक नृत्य-संगीत के बीच धूमधाम से किया गया। इस दौरान आदिवासी कलाकारों की सुरीली प्रस्तुति और वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। वनभोज गृह का उद्घाटन रेंजर की अनुपस्थिति में उनके अधिकृत प्रतिनिधियों वनरक्षी संदीप कुमार, लोकेश कुमार, विकास कुमार तथा संतपुर के गुमास्ता वंशराज महतो ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन से पहले ईको विकास समिति संतपुर के अध्यक्ष एवं वनभोज गृह संचालक संतोष काजी द्वारा हवन-पूजन कर विधिवत शुभारंभ कराया गया। मौके पर नेचर गाइड प्रेम कुमार, मुंद्रिका यादव और पूर्व ईडीसी अध्यक्ष अनिरुद्ध खतईत समेत कई लोग मौजूद रहे।


करीब पांच महीने से निर्माणाधीन इस वातानुकूलित वनभोज गृह के शुरू होने से अब जंगल कैंप आने वाले पर्यटकों को भोजन और जलपान की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। अब तक पर्यटक मुख्य रूप से वाल्मीकि विहार परिसर स्थित कैंटीन पर निर्भर थे, लेकिन नई सुविधा शुरू होने से बंबू हट परिसर में भी स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध रहेगा। इससे पर्यटकों की सुविधाओं में काफी इजाफा होने की उम्मीद है। वन विभाग के नियमों के तहत इस वनभोज गृह का संचालन ईको विकास समिति संतपुर द्वारा किया जाएगा। हर दो वर्ष पर होने वाले ईडीसी चुनाव के बाद निर्वाचित अध्यक्ष को संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। कैंटीन से होने वाली कुल आय का 20 प्रतिशत हिस्सा वन विभाग को दिया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि नए पर्यटन सत्र से यहां आने वाले पर्यटकों को आदिवासी पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखने को मिलेगा। संचालक संतोष काजी ने बताया कि विशेष थाली में चेची, पकली, पेठा और आनंदी का भुजा जैसे स्थानीय व्यंजन परोसे जाएंगे। इससे पर्यटक न सिर्फ स्वाद का आनंद लेंगे, बल्कि आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन और खान-पान को भी करीब से जान सकेंगे। वन विभाग की यह पहल पर्यटन को नई पहचान देने के साथ स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा देगी।

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