

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:-
गंडक नदी का मटमैला पानी एक बार फिर तटवर्ती इलाकों के लोगों के लिए खतरे का संकेत बन गया है। नदी की धारा में अचानक आए बदलाव और तेज बहाव को देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। चकदहवा, कान्हीं टोला, बीन टोला, झंडू टोला और थाड़ी क्षेत्र के लोग नदी के रंग को देखकर संभावित बाढ़ का अंदेशा लगाने लगे हैं। वर्षों से नदी किनारे जीवन बिताने वाले ग्रामीणों के अनुसार गंडक का मटमैला पानी सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले खतरे की चेतावनी माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नदी का पानी साफ दिखाई देता है तो लोग निश्चिंत रहते हैं कि स्थिति सामान्य है। लेकिन जैसे ही पानी मटमैला होने लगता है और उसका बहाव तेज हो जाता है, लोगों की चिंता बढ़ जाती है। ग्रामीण इसे नेपाल और पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले नए बहाव का संकेत मानते हैं। उनका अनुभव कहता है कि ऐसे समय नदी का जलस्तर तेजी से बदल सकता है और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोग अब सतर्क हो गए हैं। मवेशियों के लिए ऊंचे स्थान तलाशे जा रहे हैं और लोग लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मटमैला पानी आते ही उनके जीवन की दिनचर्या बदल जाती है। दिन-रात नदी की गतिविधियों पर नजर रखनी पड़ती है ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाया जा सके। स्थानीय निवासी गुलाब अंसारी बताते हैं कि जब पानी के साथ लकड़ियां, झाड़ियां और अन्य कचरा बहकर आने लगता है तथा नदी की धारा का वेग बढ़ जाता है, तब यह साफ संकेत होता है कि पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है। ऐसे हालात में लोग बाढ़ और संभावित पलायन को लेकर चिंतित हो जाते हैं। इधर प्रशासन ने भी बाढ़ सीजन को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। एक जून से आधिकारिक रूप से बाढ़ अवधि शुरू होने वाली है। इसके साथ ही गंडक बराज नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा और जल संसाधन विभाग द्वारा नदी के जलस्तर तथा डिस्चार्ज की लगातार निगरानी की जाएगी। मानसून से पहले ही गंडक के मटमैले पानी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।










