औचक निरीक्षण में चमका भेड़िहारी विद्यालय, डीईओ ने व्यवस्था और शिक्षा गुणवत्ता की सराहना, बच्चों से संवाद कर परखा ज्ञान स्तर।

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मध्याह्न भोजन से लेकर पठन-पाठन तक हर पहलू की हुई गहन जांच

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- थाना क्षेत्र स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भेड़िहारी में बुधवार की सुबह जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) रविंद्र कुमार एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी फूदन राम ने औचक निरीक्षण कर विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यालय के अभिलेखों की बारीकी से जांच की तथा छात्र-छात्राओं के लिए तैयार किए जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को भी परखा। निरीक्षण के क्रम में डीईओ ने विद्यालय के शिक्षकों के साथ बैठक कर शैक्षणिक गतिविधियों, छात्रों की उपस्थिति, पठन-पाठन की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बच्चों को निशुल्क पोशाक एवं पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं विद्यालय भवनों का भी आधुनिक स्वरूप में निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजें, क्योंकि अब यहां भी निजी विद्यालयों के समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
इस दौरान डीईओ रविंद्र कुमार ने कक्षा सात और आठ के विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर स्वयं गणित और विज्ञान विषय पढ़ाया। उन्होंने छात्रों से उनके पाठ्यक्रम से संबंधित प्रश्न पूछकर उनके ज्ञान का आकलन किया। छात्रों द्वारा दिए गए संतोषजनक उत्तरों से वे काफी प्रभावित हुए और संबंधित शिक्षकों की सराहना की। विशेष रूप से अष्टम वर्ग की छात्रा शिवांगी कुमारी द्वारा सूक्ष्म जीवों से जुड़े प्रश्नों के सटीक उत्तर ने डीईओ का ध्यान आकर्षित किया।


मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी डीईओ ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने रसोइयों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों के भोजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि जब सरकार सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा रही है, तो गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की समुचित व्यवस्था, अनुशासन और साफ-सफाई को देखकर डीईओ ने प्रधानाध्यापक शत्रुघ्न कुमार की विशेष सराहना की। शत्रुघ्न कुमार अपने समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पूरे क्षेत्र में चर्चित हैं। वे स्वयं गांव-गांव जाकर अनुपस्थित बच्चों को विद्यालय लाने का प्रयास करते हैं और कई बार उन्हें अपनी स्कूटी से घर से लाकर स्कूल तक पहुंचाते हैं। उनके इस प्रयास का सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। जो बच्चे पहले विद्यालय से दूर थे, वे अब नियमित रूप से पढ़ाई में जुट रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के प्रति उनका यह समर्पण समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

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