

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- भूमि अधिकार को लेकर वाल्मीकिनगर में सियासी हलचल तेज हो गई है। भाकपा (माले) के आह्वान पर गुरुवार सुबह सैकड़ों स्थानीय लोगों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें गंडक विभाग द्वारा दशकों से बसे लोगों को अतिक्रमणकारी बताते हुए नोटिस जारी करने पर तीखा विरोध दर्ज किया गया। बैठक में 1960 के दशक से रह रहे परिवारों के भविष्य को लेकर चिंता और आक्रोश साफ नजर आया। बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार खुद ही भूमि संबंधी बीपीपीएचटी एक्ट 1948 का उल्लंघन कर रही है और वर्षों से बसे लोगों को जबरन अतिक्रमणकारी घोषित कर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जो जहां बसे हैं, उन्हें उनकी जमीन का परचा अविलंब दिया जाए।”सभा में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि पीढ़ियों से बसे परिवारों को उजाड़ने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा। गंडक विभाग द्वारा जारी नोटिसों को अन्यायपूर्ण और मनमाना बताते हुए उसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। इस दौरान “जिस जमीन पर हम बसे हैं, वो जमीन हमारी है” के नारों से माहौल गूंज उठा। लोगों ने यह भी चेतावनी दी कि बिहार को “भाजपाई बुलडोजर राज” की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं, चाहे इसके लिए लंबी लड़ाई ही क्यों न लड़नी पड़े। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 17 अप्रैल को बगहा अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय के समक्ष विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान प्रशासन को मांगपत्र सौंपकर जमीन का वैध परचा देने और नोटिस वापस लेने की मांग दोहराई जाएगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं और यही उनकी जीविका का एकमात्र साधन है। ऐसे में उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाने की कार्रवाई न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके अस्तित्व पर भी सीधा खतरा है। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस बढ़ते जनाक्रोश के बीच क्या रुख अपनाता है और लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का समाधान कैसे करता है।










