लखन के बाद शत्रुघ्न की गूंज, दो शिक्षक भाइयों ने पेश की शिक्षा सेवा की अनोखी मिसाल।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की एक अनूठी मिसाल इन दिनों वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के भेड़िहारी से सामने आ रही है। यहां राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भेड़िहारी (अतिरिक्त) के प्रधानाध्यापक शत्रुघ्न कुमार अपने कार्यों के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। खास बात यह है कि उनके बड़े भाई लखन प्रसाद भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं, जिससे यह शिक्षक परिवार समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। प्रधानाध्यापक शत्रुघ्न कुमार विद्यालय से अनुपस्थित रहने वाले बच्चों को खुद घर-घर जाकर स्कूल लाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। वे अपनी स्कूटी से गांव-गांव घूमते हैं, बच्चों और उनके अभिभावकों से मिलते हैं और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाते हैं। कई बार वे बच्चों को अपनी स्कूटी पर बैठाकर स्वयं विद्यालय तक लेकर आते हैं। उनका यह प्रयास न केवल कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है, बल्कि शिक्षा के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। आज के समय में जब आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और जागरूकता की कमी के कारण कई बच्चे स्कूल से दूर हो जाते हैं, ऐसे में शत्रुघ्न कुमार का यह अभियान उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। उनके प्रयासों का असर साफ तौर पर दिख रहा है। कई बच्चे फिर से स्कूल की ओर लौट रहे हैं और नियमित रूप से पढ़ाई में जुट रहे हैं। वहीं, उनके बड़े भाई लखन प्रसाद, जो प्राथमिक विद्यालय रोहुआ टोला में प्रधानाध्यापक हैं, पहले से ही अपनी अनोखी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्हें शिक्षा विभाग द्वारा कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वे न केवल बच्चों को पढ़ाने में समर्पित हैं, बल्कि उनके समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान देते हैं। वे स्वयं बच्चों के नाखून काटते हैं और उनका जन्मदिन विद्यालय में ही मनाते हैं, जिससे बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और उत्साह बढ़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इन दोनों भाइयों के कार्यों की जमकर सराहना की है। भेड़िहारी कॉलोनी निवासी तापोश टैगोर, राजेश कुमार, विपिन सरकार और पूर्व मुखिया प्रतिनिधि राजलाल महतो ने कहा कि ऐसे शिक्षक ही समाज को शिक्षा की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि शत्रुघ्न कुमार द्वारा घर-घर जाकर बच्चों को प्रेरित करना और उन्हें स्कूल तक लाना एक अद्भुत पहल है, जो अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक शत्रुघ्न कुमार का कहना है कि हर बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाना ही एक सच्चे शिक्षक का कर्तव्य है। उनका मानना है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। निस्संदेह, लखन और शत्रुघ्न जैसे शिक्षक समाज के लिए गर्व का विषय हैं। उनके प्रयास न केवल बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, बल्कि पूरे समाज में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और जागरूक माहौल भी तैयार कर रहे हैं।

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