

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- बंद पड़ी चनपटिया चीनी मिल को पुनः चालू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम पश्चिमी चंपारण जिले में भ्रमण कर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हुई है। टीम द्वारा क्षेत्र में गन्ना खेती की संभावनाओं, संसाधनों और आधारभूत संरचनाओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है। इसी सिलसिले में बुधवार को टीम ने वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज का निरीक्षण किया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य गन्ना उत्पादन के लिए उपलब्ध सिंचाई सुविधाओं, विशेषकर नई सिंचाई प्रणालियों का आकलन करना था। इस दौरान मुख्य गन्ना सलाहकार डॉ. आर.बी. डाले के नेतृत्व में टीम ने बैराज से निकलने वाली नहरों, जल आपूर्ति व्यवस्था और खेतों तक पानी पहुंचाने की क्षमता का जायजा लिया। टीम ने यह समझने का प्रयास किया कि क्षेत्र में गन्ना खेती के विस्तार के लिए जल संसाधन कितने सक्षम हैं और किन सुधारों की आवश्यकता है।

निरीक्षण के दौरान ईख पदाधिकारी बेतिया यश सुंदरम, रामनगर के संबंधित अधिकारी, ईख प्रसार पदाधिकारी बेतिया के साथ-साथ स्थानीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने मिलकर क्षेत्र की कृषि स्थिति, किसानों की जरूरतों और संभावित चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिंचाई व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, तो पश्चिमी चंपारण गन्ना उत्पादन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे न केवल बंद पड़ी चनपटिया चीनी मिल को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय किसानों को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। फिलहाल, टीम द्वारा जुटाए गए आंकड़ों और निरीक्षण के आधार पर विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद मिल के पुनः संचालन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।










