जमीन बेदखली की आशंका से ग्रामीणों में उबाल, वन अधिकार को लेकर 17 अप्रैल को निर्णायक प्रदर्शन।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकिनगर,गनौली एवं मदनपुर वन क्षेत्र में इन दिनों जमीन और अधिकारों को लेकर माहौल गर्म है। गंडक प्रोजेक्ट में निवास कर रहे हजारों भूमिहीन एवं गरीब आदिवासियों और परंपरागत वनवासियों की भूमि से बेदखली तथा घरों पर बुलडोजर चलने की आशंका ने इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। भाकपा (माले) ने इस पूरी कार्रवाई को “अपराधपूर्ण” बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और वन अधिकार कानून 2006 के खुले उल्लंघन की बात कही है। भाकपा (माले) के केंद्रीय कमेटी सदस्य व पूर्व सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने गनौली में जिला वन क्षेत्र पदाधिकारी और रेंजर से वार्ता के बाद ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के कारण हजारों गरीब परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून 2006 के तहत दिसंबर 2005 तक जिन आदिवासियों और वनवासियों का जमीन पर कब्जा रहा है, उन्हें कानूनी रूप से भूमि का अधिकार दिया जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक बड़ी संख्या में पात्र लोगों को पर्चा नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार गैर-आदिवासी परिवार भी, यदि वे तीन पीढ़ियों यानी लगभग 75 वर्षों से वन भूमि पर रहकर जीविकोपार्जन कर रहे हैं, तो उन्हें भी भूमि अधिकार मिलना चाहिए। बावजूद इसके, वर्षों से आवेदन दिए जाने के बाद भी न तो ग्राम सभाओं का समुचित गठन किया गया और न ही वन अधिकार समितियों का निर्माण हुआ। इससे हजारों परिवार आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं।
माले नेता ने यह भी आरोप लगाया कि अब तक केवल 121 प्रभावशाली लोगों को ही जमीन का पर्चा दिया गया है, जबकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद गरीब और भूमिहीन आदिवासी अब भी इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानून में एक व्यक्ति को अधिकतम चार हेक्टेयर तक भूमि देने का प्रावधान है, लेकिन इसका लाभ व्यापक स्तर पर लागू नहीं किया गया।
सभा के दौरान उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि तत्काल ग्राम सभा और वन अधिकार समितियों का गठन कराया जाए, सभी पात्र आदिवासियों और परंपरागत वनवासियों को जमीन का अधिकार पत्र दिया जाए तथा सामूहिक वन अधिकारों को बहाल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इसी कड़ी में 17 अप्रैल को बगहा अनुमंडल मुख्यालय पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। माले नेताओं ने भूमिहीन गरीबों, न्यायप्रिय नागरिकों और लोकतांत्रिक सोच रखने वाले सभी लोगों से एकजुट होकर इस आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। कार्यक्रम में कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। क्षेत्र में बढ़ते असंतोष को देखते हुए अब प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, और सभी की निगाहें आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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