वीटीआर को मिलेगा ‘हाथियों का तोहफा’, कर्नाटक-असम से आएंगे 4 नर-मादा हाथी, इको-टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान।

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बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास को लेकर एक अहम पहल शुरू की गई है। रिजर्व में जल्द ही कर्नाटक और असम से चार प्रशिक्षित नर और मादा हाथी लाए जाएंगे। यह घोषणा प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंद सिंह ने अपने दो दिवसीय वाल्मीकिनगर दौरे के दौरान की। उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य वीटीआर में हाथियों की संख्या बढ़ाना, बाघों की सुरक्षा को मजबूत करना और इको-टूरिज्म को नई दिशा देना है। वर्तमान में रिजर्व में चार नर हाथी मौजूद हैं, लेकिन मादा हाथियों की कमी के कारण इनके वंशवृद्धि में बाधा आ रही थी। अब चार नए हाथियों के आने से यह समस्या दूर होगी और कुल संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी, जिससे जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन हाथियों के साथ प्रशिक्षित महावत भी आएंगे। ये महावत स्थानीय कर्मियों को हाथियों की देखभाल, प्रशिक्षण और संचालन की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराएंगे। इससे न केवल हाथियों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा, बल्कि जंगल में गश्ती (पेट्रोलिंग) व्यवस्था भी और अधिक प्रभावी बनेगी। खासकर बारिश के मौसम में, जब वन क्षेत्र के कई हिस्सों में वाहनों की पहुंच कठिन हो जाती है, तब हाथियों की मदद से निगरानी बेहद कारगर साबित होती है। वीटीआर में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण कई बार उनके जंगल से बाहर निकलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में हाथियों के माध्यम से रेस्क्यू ऑपरेशन और निगरानी कार्य को और मजबूत किया जाएगा। पहले से ही हाथियों का उपयोग वन्यजीव संरक्षण में किया जा रहा है, लेकिन संख्या बढ़ने से इन कार्यों में और तेजी आएगी। पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि जब ये हाथी यहां के वातावरण में पूरी तरह ढल जाएंगे, तब इनका उपयोग हाथी सफारी और अन्य आकर्षक गतिविधियों में किया जाएगा। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा और वीटीआर की पहचान एक विश्वस्तरीय इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में और मजबूत होगी। इसी क्रम में वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र में पर्यटकों के लिए 30 बेड वाला आधुनिक ‘इको-फ्रेंडली अतिथि भवन’ भी बनाया जाएगा। इससे पर्यटकों के ठहरने की समस्या काफी हद तक दूर होगी। साथ ही, पर्यटक परिसर को विकसित कर वहां विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। वीटीआर के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित टूरिज्म सेंटर को भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।


दौरे के दौरान दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के वेतन वृद्धि के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि वेतन भुगतान में आ रही तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर कर लिया जाएगा। वाल्मीकिनगर क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में वन विभाग का प्रयास है कि यहां आने वाले सैलानियों को बेहतर सुविधाएं मिलें और उनका अनुभव यादगार बने। दौरे के दौरान एसीएफ सत्यम कुमार, रेंजर राजकुमार पासवान, रेंजर सत्यम कुमार और बायोलॉजिस्ट डॉ. सौरव वर्मा भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विकास कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कुल मिलाकर, हाथियों के आगमन और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से वीटीआर आने वाले समय में न केवल वन्यजीव संरक्षण का मजबूत केंद्र बनेगा, बल्कि इको-टूरिज्म के क्षेत्र में भी नई पहचान स्थापित करेगा।

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