एक ही दिन में तीन बार ‘जंगल के राजा’ का दीदार, वाल्मीकिनगर में रोमांच का चरम।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर : भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक बार फिर रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र बन गया, जब जंगल सफारी पर आए पर्यटकों को एक ही दिन में तीन बार ‘जंगल के राजा’ बंगाल टाइगर के दर्शन हुए। इस दुर्लभ और रोमांचक अनुभव ने पर्यटकों की खुशी को चरम पर पहुंचा दिया। शनिवार का दिन गोरखपुर और मोतिहारी से आए परिवारों के लिए अविस्मरणीय बन गया। सुबह, दोपहर और शाम—तीनों समय सफारी के दौरान मोटर अड्डा सहित अन्य जंगल क्षेत्रों में बाघ का दीदार हुआ। सबसे खास बात यह रही कि बाघ कुछ देर तक खुले क्षेत्र में शांत मुद्रा में टहलता रहा, जिससे पर्यटकों को उसे बेहद करीब से देखने और कैमरों में कैद करने का सुनहरा मौका मिला। सफारी में शामिल गोरखपुर के डॉ. रजनीश पांडेय, उनकी पत्नी डॉ. अभिलाषा और बेटी मुक्त ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि बाघ को देखने की उनकी वर्षों पुरानी इच्छा आज पूरी हो गई। वहीं, मोतिहारी से आए राजेश वर्णवाल और सूर्यकांत तिवारी के परिवार ने इसे जीवन का सबसे यादगार अनुभव बताया। बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था—वे बाघ को देखकर खुशी से झूम उठे और इस पल को अपने कैमरों में कैद करते रहे। वाल्मीकिनगर का यह टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां बाघ के अलावा तेंदुआ, भालू, गौर, सांभर और कई प्रजातियों के हिरण भी पाए जाते हैं। हालांकि, बाघ का दर्शन बेहद दुर्लभ माना जाता है, इसलिए जब भी यह दृश्य सामने आता है, पूरा सफारी अनुभव खास बन जाता है। वन विभाग के अनुसार, 23 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए पर्यटन सत्र में यह चौथा मौका है जब पर्यटकों को बाघ दिखाई पड़ा है। लगातार हो रही टाइगर साइटिंग यह संकेत देती है कि जंगल में बाघों की सक्रियता बढ़ रही है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि इस सत्र में बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में पर्यटक वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार कुछ विदेशी पर्यटकों का आगमन भी हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रिजर्व की पहचान और मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाती है। होटल, गाइड और छोटे व्यवसायों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिल रही है। घने जंगल, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और बाघ की शाही मौजूदगी—इन सबने मिलकर वाल्मीकिनगर को इस समय पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण बना दिया है। यहां आने वाला हर पर्यटक रोमांच, सुकून और अविस्मरणीय यादों के साथ लौट रहा है।

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