

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर :- नेपाल के तराई इलाके से लेकर भारतीय सीमा क्षेत्र तक शुक्रवार की दोपहर मौसम ने अचानक करवट ली, जिसने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तेज गरज, आंधी और ओलावृष्टि के साथ हुई झमाझम बारिश ने खासकर आम और लीची की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस अप्रत्याशित मौसम बदलाव से किसान गहरे सदमे में हैं। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष आम और लीची की फसल बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही थी। बागानों में मंजर अच्छी मात्रा में आए थे और किसान बेहतर उत्पादन को लेकर आशान्वित थे। लेकिन अचानक हुई ओलावृष्टि ने इन उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। तेज हवा और ओलों की मार से करीब 40 प्रतिशत तक आम और लीची के मंजर झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
कृषि वैज्ञानिक विनय कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य बारिश फसलों के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन जब बारिश के साथ ओलावृष्टि होती है, तो यह बेहद नुकसानदेह साबित होती है। उन्होंने कहा कि आम और लीची के नाजुक मंजर इस मार को सहन नहीं कर पाए और बड़ी संख्या में झड़ गए। इससे किसानों की आय पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने आगे बताया कि दलहन और तेलहन की फसलों को भी इस मौसम का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जिन किसानों की फसल पक चुकी थी, उन्हें आंशिक नुकसान होगा, लेकिन जिनकी फसल अभी पकने की स्थिति में नहीं थी, उनके लिए यह बारिश और ओलावृष्टि और भी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है। शुक्रवार की दोपहर अचानक तेज हवाओं और गरज के साथ मौसम में ठंडक घुल गई, जिससे लोगों को एक बार फिर हल्की ठंड का अहसास हुआ। हालांकि, इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों और बागानों में गिरे ओलों ने फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम विभाग के पर्यवेक्षक पंकज कुमार ने बताया कि अगले 24 घंटों के दौरान भी गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। खासकर तेज आंधी और बिजली कड़कने के समय पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें, क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है। इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मौसम का बदलता मिजाज किसानों के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जहां एक ओर प्राकृतिक आपदाएं फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों की मेहनत और उम्मीदें भी प्रभावित हो रही हैं। फिलहाल, किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और मौसम के स्थिर होने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि बची हुई फसलों को किसी तरह सुरक्षित रखा जा सके।










