तल्ख मौसम में धधक उठा वीटीआर का जंगल, वीटीआर में दावानल से 5 एकड़ वनक्षेत्र खाक, वन संपदा और वन्यजीवों पर संकट।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:-वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र में तापमान बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेज हो गई हैं। मंगलवार की दोपहर जंगल दावानल की चपेट में आ गया, जिससे करीब 5 एकड़ क्षेत्र में फैली झाड़ियां और बेशकीमती जड़ी-बूटियां जलकर राख हो गईं। इस घटना ने वन विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र के ऊपरी शिविर स्थित जंगल कक्ष संख्या टी-1 के समीप शरारती तत्वों द्वारा आग लगा दी गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैलने लगी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।

आग लगने के बाद पूरे वन क्षेत्र में धुएं का गुबार छा गया, जिससे आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वनकर्मी और फायर कर्मी मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग द्वारा आग से निपटने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। उनका कहना है कि विभाग को अक्सर आग की जानकारी तब मिलती है, जब वह बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले चुकी होती है। दावानल से न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि छोटे-छोटे वन्य प्राणियों की जान भी जा रही है। झाड़ियों में रहने वाले जीव-जंतु आग की चपेट में आकर अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, जंगल में मौजूद दुर्लभ औषधीय पौधे और जड़ी-बूटियां भी नष्ट हो रही हैं, जिनका पुनः उगना आसान नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में आग लगने की एक बड़ी वजह लोगों की गलत धारणाएं भी हैं। कई ग्रामीण यह मानते हैं कि पुरानी घास को जलाने से नई और अधिक मात्रा में घास उगती है। इसी सोच के चलते कुछ शरारती तत्व जानबूझकर झाड़ियों में आग लगा देते हैं। लेकिन वे यह नहीं समझते कि यह आग पूरे जंगल को तबाह कर सकती है। वन विभाग के लिए यह समय सतर्कता बढ़ाने का है। नियमित गश्ती, जागरूकता अभियान और त्वरित कार्रवाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकते हैं। अन्यथा, हर साल गर्मी के मौसम में जंगल इसी तरह धधकते रहेंगे और पर्यावरण को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस बाबत बाल्मीकि नगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है।

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