

बेतिया/वाल्मीकिनगर :- गंडक प्रोजेक्ट कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के सामने अचानक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जल संसाधन विभाग द्वारा अतिक्रमित भवन और भूमि को खाली करने के लिए जारी नोटिस के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। विभाग ने लगभग एक हजार से अधिक लोगों को सात दिनों के भीतर मकान खाली करने का निर्देश दिया है, जिससे कॉलोनी में रहने वाले परिवारों के बीच हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने वाल्मीकिनगर स्थित गंडक प्रोजेक्ट कॉलोनी के विभिन्न इलाकों में रहने वाले लोगों को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर भवन और भूमि खाली करने को कहा है। विभाग की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि तय तिथि तक भवन खाली नहीं करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस जारी होने के बाद गुरुवार की सुबह ऊपरी शिविर तीन नंबर पहाड़ स्थित महादलित बस्ती के सैकड़ों महिला और पुरुष सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने जल संसाधन विभाग और सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि उनके पूर्वज गंडक बैराज के निर्माण के समय यहां आए थे और कई वर्षों तक जल संसाधन विभाग में काम भी किया। उस समय से ही उनके परिवार यहीं बस गए और आज लगभग 65 वर्षों से वे लोग इसी जगह रह रहे हैं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि अचानक मकान खाली करने का आदेश मिलने से उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उन्हें यहां से हटाया जाता है तो आखिर वे लोग कहां जाएंगे। ऊपरी शिविर तीन नंबर पहाड़ से लेकर जी टाइप, एफ टाइप, एनपीसीसी, टीएफटी कॉलोनी और गोल चौक तक के दुकानदारों और निवासियों ने भी विभाग के निर्णय पर नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों ने साफ कहा कि यदि उनके साथ जबरन कार्रवाई की गई तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इधर, नोटिस जारी होने के बाद 9 मार्च को गोल चौक व्यावसायिक संघ के एक शिष्टमंडल ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता और अधीक्षण अभियंता से मुलाकात की थी। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि भवन खाली कराने और अतिक्रमण हटाने का आदेश विभाग के वरीय अधिकारियों तथा जिलाधिकारी के निर्देश पर जारी किया गया है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं है। शिष्टमंडल के सदस्यों में शामिल अमित कुमार सिंह, कौलेश्वर शर्मा और उपमुखिया रवि प्रकाश गुप्ता ने अधिकारियों से आग्रह किया कि ऐसा कोई रास्ता निकाला जाए जिससे वर्षों से रह रहे लोगों को विस्थापित होने से बचाया जा सके। वहीं प्रोजेक्ट कॉलोनी में रहने वाले लोगों और दुकानदारों ने विभाग से मांग की है कि मकानों और दुकानों का विधिवत आवंटन कर उन पर उचित किराया तय कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे सरकार को नियमित राजस्व देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें उनके घरों से बेघर न किया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले में सरकार और प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए समाधान निकालना चाहिए, ताकि वर्षों से यहां बसे परिवारों को अचानक विस्थापन का सामना न करना पड़े। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।








