वेतन बढ़ोतरी के आश्वासन पर अमल नहीं, आक्रोशित वनकर्मियों ने बनाई आंदोलन की रणनीति।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के वन प्रमंडल एक, दो और तीन में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को बहुअरवा कुटी में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। बैठक का आयोजन दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय राम की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में वन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा वेतन बढ़ोतरी का आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक उस पर अमल नहीं होने और बकाया वेतन का भुगतान नहीं किए जाने को लेकर वनकर्मियों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। बैठक में बड़ी संख्या में उपस्थित दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों ने अपनी समस्याओं और कठिनाइयों को साझा किया। संघ के अध्यक्ष अजय राम ने बताया कि दिसंबर 2025 में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर वाल्मीकिनगर दौरे पर आए थे। उस दौरान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की समस्याओं को विस्तार से रखा था।
अजय राम ने बताया कि उस समय प्रधान सचिव ने आश्वासन दिया था कि जनवरी 2026 से सभी दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों के मानदेय में पांच हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी जाएगी और उनका बकाया वेतन भी जल्द भुगतान कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद संघ ने अपने प्रस्तावित आंदोलन की रणनीति को स्थगित कर दिया था और विभाग के फैसले का इंतजार करने का निर्णय लिया था। हालांकि, जनवरी माह से लेकर अब तक वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई है और न ही बकाया राशि का भुगतान किया गया है। इस कारण दैनिक वेतनभोगी वनकर्मियों में निराशा और असंतोष का माहौल व्याप्त है। बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वे दिन-रात कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, लेकिन उनके अधिकारों और मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है। दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के जिला मंत्री जयप्रकाश तालुकदार ने कहा कि कर्मचारियों ने अब तक धैर्य और संयम का परिचय दिया है, लेकिन यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि अप्रैल महीने से पहले वेतन बढ़ोतरी के साथ बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो अप्रैल से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को विभाग के समक्ष रख रहे हैं। लेकिन यदि उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की गई तो सभी वन प्रमंडलों में एकजुट होकर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 15 मार्च को संघ की एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति और कार्यक्रम तय किए जाएंगे। इस बैठक में सभी वन प्रमंडलों के प्रतिनिधियों को शामिल होने के लिए कहा गया है। वनकर्मियों ने उम्मीद जताई कि विभाग जल्द ही उनकी समस्याओं पर सकारात्मक कदम उठाएगा, ताकि उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने की जरूरत न पड़े और वे पूरी निष्ठा के साथ जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में अपना योगदान देते रहें।

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