

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना (वीटीआर) प्रशासन ने जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं। वन विभाग ने पूरे जंगल को छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर फायर लाइन तैयार की है, ताकि यदि किसी स्थान पर आग लगती है तो उसे तुरंत नियंत्रित किया जा सके और बड़े क्षेत्र में फैलने से रोका जा सके। गर्मी के दिनों में टाइगर रिजर्व के जंगलों में आग लगने की घटनाएं आम हो जाती हैं। इससे वन संपदा के साथ-साथ वन्यजीवों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार आग की वजह से जंगली जानवर सुरक्षित स्थान की तलाश में नेपाल की ओर पलायन कर जाते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग ने इस बार पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।
फायर वाचर की तैनाती
जंगलों को आग से बचाने के लिए प्रत्येक बीट में फायर वाचरों की तैनाती की गई है। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि वाल्मीकिनगर रेंज में तीन बीट हैं और प्रत्येक बीट में पांच-पांच फायर वाचर लगाए गए हैं। इन फायर वाचरों का मुख्य कार्य फायर लाइन तैयार करना, जंगल में गश्त करना और आग की घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण करना है। फायर वाचरों को आधुनिक ब्लोअर मशीन भी उपलब्ध कराई गई है, जिसकी मदद से आग पर जल्द काबू पाया जा सकता है। इनके साथ-साथ टीटी, पीपी तथा शिकार नियंत्रण कक्ष के वनकर्मी भी जंगल की सुरक्षा के लिए लगातार सक्रिय हैं।

कंट्रोल फायरिंग से कम होगा आग का फैलाव
वन विभाग द्वारा इन दिनों कंट्रोल फायरिंग का कार्य भी किया जा रहा है। इसके तहत जंगल में पेड़ों से गिरे सूखे पत्तों को एकत्रित कर नियंत्रित तरीके से जलाया जा रहा है। इससे जंगल में ज्वलनशील पदार्थ कम होंगे और अचानक आग लगने की घटनाओं में कमी आएगी। रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि पतझड़ के मौसम में पेड़ों के सूखे पत्ते जमीन पर जमा हो जाते हैं, जो आग फैलने का मुख्य कारण बनते हैं। इसलिए इन्हें समय रहते नियंत्रित तरीके से जलाना आवश्यक होता है।
गटोर मशीन से पेड़ों की आग पर नियंत्रण
कई बार आग सूखे पेड़ों को भी अपनी चपेट में ले लेती है। ऐसी स्थिति में उसे बुझाने के लिए गटोर मशीन उपलब्ध कराई गई है। पेड़ों में लगी आग को बुझाने में यह मशीन काफी कारगर साबित होती है।
जीपीएस और सैटेलाइट से निगरानी
वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अब हाईटेक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। वनकर्मियों को जीपीएस सिस्टम से लैस किया गया है, जिससे गश्त और आग की सूचना तुरंत मिल सके। इसके अलावा सैटेलाइट की मदद से भी जंगलों की निगरानी की जा रही है। यदि कहीं आग लगती है तो इसकी सूचना तुरंत वन अनुसंधान संस्थान देहरादून तक पहुंच जाती है, जहां से संबंधित वन क्षेत्र को अलर्ट भेज दिया जाता है। इससे समय रहते आग पर काबू पाने में मदद मिलती है।
चरवाहों और ग्रामीणों पर नजर
वन विभाग जंगलों में आने-जाने वाले चरवाहों और लोगों पर भी विशेष नजर रख रहा है। अक्सर लापरवाही से फेंकी गई जलती बीड़ी या सिगरेट से जंगल में आग लगने की घटनाएं होती हैं। रेंजर ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि जंगल में ज्वलनशील पदार्थ न फेंकें। जंगल पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि जंगल में कहीं आग दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।










