



मौन धारण कर कल आस्था की डुबकी लगा दान पुण्य करने के साथ अपने-अपने शिवालयों में जलाभिषेक के लिए रवाना होंगे श्रद्धालु
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- इन्डो- नेपाल बॉर्डर स्थित संगम तट पर माघ मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान के लिए इस बार वाल्मीकिनगर में बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल के विभिन्न जगहों से सैलानियों का पहुंचना शुरू हो गया है। मन में आस्था और भक्ति का भाव लिए त्रिवेणी संगम तट की ओर आने वाले श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी वैरागी जैसा है। तन में पीली धोती लपेटे हुए बाल मुंडवाए, सर पर कुश की चटाई लिए हुए हर-हर गंगे व हर हर महादेव की जय घोष के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को देख स्थानीय लोगों के मन में भी भक्ति भावना जागृत होने लगी है। भक्ति भावना से सराबोर इन श्रद्धालुओं को वाली माघ महीने की कड़ाके की ठंड का भी फिक्र नहीं है। शुक्रवार को पीली धोती में भगवान शंकर की भक्ति भावना में लीन यूपी के गोरखपुर, कुशीनगर, पूर्वी चंपारण के ढाका, घोड़ासहन एवं चिरैया के श्रद्धालुओं ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में पेड़ों के नीचे भजन कीर्तन कर रात गुजारने का फैसला किया है। गंगा स्नान के 24 घंटे पूर्व से ही वाल्मीकि नगर भक्तिमय हो चुका है। इन श्रद्धालुओं को नारायणी की ठंड जल में स्नान करने को लेकर कष्ट ना हो इसके लिए सूर्य देव ने भी अपनी कृपा बना रखी है। तीन दिन पूर्व कुहासे से अच्छादित यह क्षेत्र अब भगवान भास्कर की कृपा से ठंड से राहत पा चुका है। जिसके कारण इस साल पिछले साल की अपेक्षा गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना है।
पूजा पाठ के नजरिए से शुभ माना जाता है कुश
कुश की चटाई लेकर आने के बारे में पूछे जाने पर गोरखपुर के महेंद्र मिश्रा, कुशीनगर के शत्रुघ्न पांडेय, घोड़ा सहन के बलिराम प्रसाद सुरेंद्र यादव एवं मन बहाली शुक्ला ने बताया कि भगवान शंकर मृग के छाला पर बैठ हिमालय पर्वतमाला पर तपस्या करते थे। उन्हें ईश्वर की भजन करने के लिए किसी दूसरे बिस्तर की जरूरत नहीं थी। हमें मृग छाला नहीं मिल सकता। उसके जगह पर घासो में सबसे शुद्ध और पूजा पाठ में काम आने वाले कुश के घास का चटाई स्वयं बनाकर उस पर बैठ, गंगा स्नान शिव पूर्व 72 घंटे भगवान शिव के मंत्र का जाप करना है। उसके बाद ही हम गंगा स्नान कर अपने-अपने शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे। श्रद्धालुओं ने बताया कि हम 7 दिनों से वैराग का रूप धारण कर, गंगा स्नान में माने जाने वाले सभी नियमों का पालन करते हुए जलाभिषेक तक सन्यासी के रूप में सात्विक भोजन करेंगे।
पीला वस्त्र भगवान विष्णु और महादेव को करता है प्रसन्न: गंगा स्नान से 72 घंटे पूर्व वाल्मीकि नगर में डेरा जमाए सन्यासी रूप धारण करने वाले श्रद्धालुओं ने पीली धोती और सर मुंडवाने के बाबत बताया कि पीला वस्त्र भगवान विष्णु और भगवान शंकर को बहुत पसंद है। यह धारण करने से यह प्रतीत होता है कि यह व्यक्ति सन्यासी रूप धारण कर भगवान के भजन में लीन है। माघ महीने के अमावस्या तिथि को गंगा स्नान करने से सात्विक शक्ति और तब फल की प्राप्ति होती है। स्नान से पूर्व सभी सनातनियों को त्रिवेणी संगम पर पूजा पाठ के साथ दान पूर्ण करना लाभदायी होता है। मौन होकर स्नान करने से आध्यात्मिक शक्ति और जीवन में सफलता सहित आत्मीय शक्ति की प्राप्ति होती है।










