

बेतिया/वाल्मीकिनगर:-भारत-नेपाल सीमा पर भूमि विवाद और बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध सीमा जागरण मंच के पदाधिकारियों ने बुधवार को भारत-नेपाल सीमा से सटे चकदहवा गांव का दौरा कर नेपाल अधीनस्थ भारतीय भूमि तथा सीमा क्षेत्र का अवलोकन किया। इस दौरान ग्रामीणों के साथ आयोजित बैठक में सीमा सुरक्षा, भूमि विवाद, बाढ़ और नेपाल द्वारा किए जा रहे बांध निर्माण से उत्पन्न संभावित खतरों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में सीमा जागरण मंच के पूर्णकालिक जिला महामंत्री गोविंद कुमार यादव, जिलाध्यक्ष तापोश टैगोर, संरक्षक बबलू सिंह, देवेंद्र कुमार सिंह, दिनेश कुमार गुप्ता, शेखर सुमन, डॉ. संजय प्रसाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पदाधिकारियों ने ग्रामीणों से सीमा संबंधी समस्याओं और चुनौतियों की जानकारी लेते हुए उन्हें एकजुट रहने और राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। बैठक को संबोधित करते हुए संरक्षक बबलू सिंह ने कहा कि चकदहवा, झंडू टोला, बीन टोली और कान्ही टोला जैसे सीमावर्ती गांव भारतीय सीमा और हजारों एकड़ भूमि की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन गांवों के लोग यहां नहीं रहते तो पड़ोसी देश नेपाल अब तक इस क्षेत्र पर कब्जा कर चुका होता। उन्होंने सरकार और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा की सुरक्षा में योगदान देने वाले इन गांवों में आज भी सड़क, बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जबकि चंद कदम की दूरी पर स्थित सीमा पार नेपाल के सुस्ता गांव में चौड़ी सड़कें, अस्पताल, चौबीस घंटे बिजली और बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध है। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की। ग्रामीण इस्लाम अंसारी, गुलाब अंसारी, संजय कुशवाहा, नंदकिशोर बीन, बसंत बिन, राजू कुमार और शिवजी प्रसाद ने बताया कि नेपाल के सुस्ता गांव के लोग अक्सर उन्हें वहां बसने का प्रलोभन देते हैं। ग्रामीणों के अनुसार सुस्ता के लोग कहते हैं कि नेपाल में आकर रहने पर सभी सरकारी सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी भारतीय पहचान और भूमि को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यदि इन चार गांवों की आबादी यहां से हट गई तो हजारों एकड़ भारतीय भूमि पर नेपाल का दावा और मजबूत हो जाएगा।
बैठक के बाद सीमा जागरण मंच के अधिकारियों ने भारत-नेपाल सीमा का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान चकदहवा गांव में हाल ही में स्थापित एसएसबी के नए चेक पोस्ट का जायजा लिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व सीमा विवाद के बाद यहां चेक पोस्ट बनाया गया है, जहां दिन के समय जवान तैनात रहते हैं, लेकिन रात में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं रहती। दरअसल, विवाद की जड़ नेपाल के सुस्ता गांव द्वारा गंडक नदी के कटाव से बचाव के लिए बनाए जा रहे बांध को माना जा रहा है। भारतीय सीमा से सटे रमपुरवा गांव के लोगों का कहना है कि यदि नेपाल की ओर बांध बन गया तो गंडक नदी का कटाव भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ जाएगा, जिससे गांवों के नदी में समाने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि भारतीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी समानांतर बांध का निर्माण कराया जाए, लेकिन कथित रूप से नेपाल की ओर से इसका विरोध किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों की सीमा पर तनाव और चिंता का माहौल बना हुआ है।










