

डांडिया, झरका और झमटा नृत्य ने बांधा समां, सीतामढ़ी व यूपी से आए पर्यटक हुए मंत्रमुग्ध
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- पर्यटन नगरी वाल्मीकिनगर स्थित वाल्मीकि विहार परिसर इन दिनों आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंगों से सराबोर है। सप्ताहांत पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के पारंपरिक झमटा, डांडिया और झरका नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पर्यटकों का दिल जीत लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने अपनी शानदार कला प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे। वन विभाग की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पर्यटकों को आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से रूबरू कराना भी है। कार्यक्रम में सीतामढ़ी, गोरखपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से आए पर्यटक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। लोकगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों पर प्रस्तुत नृत्यों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। महिला एवं पुरुष कलाकारों ने झमटा नृत्य के माध्यम से खेती-किसानी, फसल बुवाई और कटाई से जुड़े पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति दी। साथ ही देशभक्ति गीतों ने भी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं डांडिया और झरका नृत्य में फिल्मी गीतों और लोक धुनों का अनूठा संगम देखने को मिला। झरका नृत्य के जरिए अतिथियों के स्वागत की पारंपरिक संस्कृति को दर्शाया गया, जिसे पर्यटकों ने काफी सराहा। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि कई पर्यटक स्वयं को रोक नहीं पाए और कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर नृत्य करते नजर आए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ प्रदर्शित झांकियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इन झांकियों के माध्यम से आदिवासी जीवनशैली, पारंपरिक वेशभूषा, रीति-रिवाज और सामाजिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की गई। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस सांस्कृतिक पहल की शुरुआत अक्टूबर 2019 में की गई थी। तब से यह कार्यक्रम पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। विशेष रूप से शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटक वाल्मीकिनगर पहुंचते हैं, जिन्हें स्थानीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए प्रत्येक शनिवार को इस तरह के आयोजन किए जाते हैं। रेंजर सत्यम कुमार ने कहा कि पर्यटकों की बढ़ती भागीदारी पर्यटन विकास के लिए सकारात्मक संकेत है। इस पहल से जहां वाल्मीकिनगर के पर्यटन को नई पहचान मिल रही है, वहीं स्थानीय आदिवासी कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सशक्त मंच भी प्राप्त हो रहा है। वाल्मीकि विहार की यह सांस्कृतिक संध्या अब पर्यटकों के लिए एक यादगार आकर्षण बन चुकी है।










