वाल्मीकिनगर की जैव विविधता का अध्ययन करने पहुंची भारत स्काउट गाइड की टीम।

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सीतामढ़ी के 18 प्रशिक्षु तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर वीटीआर पहुंचे, वन्यजीवों और वनस्पतियों पर तैयार करेंगे रिपोर्ट।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- भारत स्काउट एवं गाइड, सीतामढ़ी शाखा के 18 सदस्यीय प्रशिक्षु दल ने रविवार को तीन दिवसीय शैक्षणिक एवं वन भ्रमण कार्यक्रम के तहत वाल्मीकिनगर पहुंचकर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) की जैव विविधता, वनस्पतियों और वन्यजीवों का अध्ययन शुरू किया। भ्रमण के दौरान जुटाई गई जानकारियों के आधार पर टीम जिला प्रशासन और विभाग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
सीतामढ़ी से पहुंचे इस दल का नेतृत्व जिला संगठन आयुक्त कैलाश सिंह कर रहे हैं। उनके साथ स्काउट मास्टर सुशील दास, गाइड कैप्टन गुड़िया कुमारी, बेबी कुमारी सहित कई प्रशिक्षु छात्र-छात्राएं शामिल हैं। दल के सदस्य हाइकिंग प्रशिक्षण पूरा करने के बाद शैक्षणिक परिभ्रमण पर भेजे गए हैं। जिला संगठन आयुक्त कैलाश सिंह ने बताया कि भारत स्काउट एवं गाइड का उद्देश्य युवाओं के बौद्धिक विकास, पर्यावरणीय जागरूकता और सामान्य ज्ञान को बढ़ावा देना है। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षुओं को वाल्मीकिनगर जैसे प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्र में भ्रमण के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि भ्रमण के दौरान विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों, वनस्पतियों और वन्यजीवों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसकी रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन, सीतामढ़ी एवं संबंधित विभाग को सौंपी जाएगी। बाद में प्रशिक्षुओं की जानकारी का मूल्यांकन भी किया जाएगा।
भ्रमण के दौरान स्काउट मास्टर सुशील दास ने प्रशिक्षुओं को जंगल क्षेत्र में विभिन्न वनस्पतियों और पेड़ों की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया, पर्यावरण संरक्षण में पेड़ों की भूमिका तथा जैव विविधता के महत्व को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्रों में शामिल है, जहां अनेक दुर्लभ वन्यजीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं। यहां प्राप्त जानकारी प्रशिक्षुओं की लिखित परीक्षाओं और भविष्य के प्रशिक्षण में भी उपयोगी साबित होगी। इस दौरान टीम ने नारायणी (गंडक) नदी के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की भी जानकारी जुटाई। स्थानीय जानकार प्रेम कुमार ने प्रशिक्षुओं को बताया कि गंडक नदी शालिग्राम पत्थरों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। उन्होंने गज-ग्राह की पौराणिक कथा और गजेंद्र मोक्ष धाम से जुड़े प्रसंगों की भी जानकारी दी। तीन दिवसीय इस भ्रमण के माध्यम से प्रशिक्षु प्रकृति, पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर रहे हैं, जो उनके व्यक्तित्व विकास और ज्ञानवर्धन में सहायक सिद्ध होंगी।

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