अमन, भाईचारे और कुर्बानी के जज़्बे के साथ मनाई गई बकरीद, मस्जिदों और ईदगाहों में उमड़ी नमाजियों की भीड़, लोगों ने गले मिलकर दी मुबारकबाद।

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बच्चों में दिखा खास उत्साह, इमाम बोले– अहंकार और नफरत त्यागने का देता है संदेश

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर : थाना क्षेत्र में गुरुवार को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व के पहले दिन सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी तथा क्षेत्र में अमन-चैन, सुख-समृद्धि और भाईचारे की दुआ मांगी। बकरीद को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। छोटे-छोटे बच्चे रंग-बिरंगे कुर्ता-पायजामा और सफेद टोपी पहनकर काफी खुश नजर आए। ईदगाहों और मस्जिदों के आसपास सुबह से ही रौनक का माहौल बना रहा। नमाज के बाद लोगों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों से मुलाकात कर पर्व की खुशियां साझा कीं। मुस्लिम समुदाय के लिए बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। यह पर्व त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। इस अवसर पर सामूहिक नमाज अदा करने के बाद कुर्बानी की रस्म निभाई गई। इस्लामिक परंपरा के अनुसार कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की परंपरा है। इसमें एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों एवं दोस्तों के लिए तथा तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का आदेश दिया था। पैगंबर इब्राहिम ने अल्लाह की राह में अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का निर्णय लिया। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, अल्लाह के हुक्म से वहां एक दुम्बा आ गया और हजरत इस्माइल सुरक्षित बच गए। इसी महान समर्पण और कुर्बानी की याद में हर वर्ष ईद-उल-अजहा मनाई जाती है। विजयपुर मस्जिद के इमाम निसार अहमद ने कहा कि बकरीद का असली संदेश केवल जानवर की कुर्बानी देना नहीं है, बल्कि अपने अंदर के अहंकार, नफरत और बुरी आदतों का त्याग करना है। यह पर्व इंसानियत, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख देता है। उन्होंने लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और समाज में प्रेम एवं एकता का संदेश फैलाने की अपील की। पर्व को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।

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