वाल्मीकि आश्रम में लव-कुश की प्राण प्रतिष्ठा, गूंजे वैदिक मंत्र और जय श्रीराम के उद्घोष

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बेतिया/वाल्मीकिनगर:- भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रसिद्ध एवं पौराणिक महत्व वाले वाल्मीकि आश्रम में गुरुवार को भगवान श्रीराम के पुत्र लव-कुश की बाल स्वरूप प्रतिमाओं की वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस अवसर पर नेपाल और भारत से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में “जय श्रीराम” के उद्घोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय वातावरण बना रहा। इस धार्मिक आयोजन की तैयारियों का दायित्व त्रिवेणी गजेंद्र मोक्ष दिव्य धाम क्षेत्र विकास समिति ने संभाला था। समारोह के दौरान विशेष पूजन, हवन और संकीर्तन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने नवस्थापित प्रतिमाओं का दर्शन कर लव-कुश की वीरता और आदर्श जीवन को स्मरण किया। नेपाल के चितवन जिले में स्थित वाल्मीकि आश्रम वाल्मीकिनगर से लगभग साढ़े चार किलोमीटर दूर घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच अवस्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम द्वारा वनवास दिए जाने के बाद माता सीता ने इसी आश्रम में आश्रय लिया था, जहां उन्होंने लव और कुश को जन्म दिया। महर्षि वाल्मीकि ने दोनों बालकों को वेद, शास्त्र और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्रदान की थी। मान्यता है कि इसी पवित्र भूमि पर महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना भी की थी। आश्रम परिसर में आज भी माता सीता की कुटिया, प्राचीन रसोई, ऐतिहासिक कुआं और वह वृक्ष मौजूद है, जिसके नीचे बैठकर लव-कुश शिक्षा ग्रहण करते थे। यही कारण है कि यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। गजेंद्र मोक्ष दिव्य धाम के स्वामी श्रीकृष्ण प्रपन्नाचार्य ने कहा कि यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके समुचित विकास के लिए सरकारी सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति अपने स्तर पर परिसर के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रतिमा निर्माणकर्ता राम अवतार कुशवाहा ने बताया कि लगभग तीन लाख नेपाली रुपये की लागत से लव-कुश की भव्य प्रतिमाओं का निर्माण कराया गया है। अमृत कुआं के समीप स्थापित ये प्रतिमाएं अब आश्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होंगी। समारोह में विश्व सनातन धर्म स्थापना जिला समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष विश्व मर्दन शाह, कार्यकारी निदेशक भूपेंद्र भूसाल, रंगू उपाध्याय, शेखर मर्दन शाह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आगामी दिनों में आश्रम परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा तथा नियमित रूप से रामधुन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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