पर्यटन सत्र के अंतिम पड़ाव पर बढ़ी वीटीआर की रौनक।

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मानसून से पहले जंगल सफारी का आनंद लेने उमड़ रहे पर्यटक, बाघों के दीदार से रोमांचित हो रहे सैलानी

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मिकी टाइगर रिजर्व (वीटीआर) का पर्यटन सत्र अब समापन की ओर अग्रसर है। मानसून के आगमन के साथ ही हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जंगल सफारी पर विराम लग जाएगा। यदि मानसून 15 जून तक पहुंच जाता है तो पर्यटन सत्र 15 जून को ही समाप्त हो सकता है, जबकि मानसून में विलंब होने की स्थिति में जून के अंतिम सप्ताह तक पर्यटन गतिविधियां जारी रह सकती हैं। हालांकि विभागीय स्तर पर अभी समापन तिथि की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पर्यटन सत्र के अंतिम दिनों में वीटीआर में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जंगल सफारी का रोमांच लेने और प्रकृति की अनुपम सुंदरता को करीब से देखने के लिए बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों से सैलानी वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं। गर्मी के मौसम में कम खर्च में प्राकृतिक वातावरण, घने जंगल, वन्यजीवों की विविधता और गंडक नदी के मनमोहक दृश्यों का आनंद लेने के लिए पर्यटक उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। विशेष बात यह है कि इस पर्यटन सत्र में बड़ी संख्या में पर्यटकों को बाघों के दर्शन हुए हैं। कई पर्यटक ऐसे रहे जो जंगल सफारी के दौरान बाघों को देखकर रोमांचित हुए। यही कारण है कि सत्र समाप्त होने से पहले अधिक से अधिक लोग वीटीआर का रुख कर रहे हैं।
वीटीआर के डिवीजन-2 के डीएफओ विकास अहलावत के अनुसार लगभग 900 वर्ग किलोमीटर में फैले बिहार के इस एकमात्र टाइगर रिजर्व में वनस्पतियों की करीब 90 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा यहां बाघों सहित लगभग 60 प्रकार के वन्यजीव, 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां तथा 30 प्रकार के रेप्टाइल्स मौजूद हैं। यही जैव विविधता जंगल सफारी को और अधिक रोमांचक बनाती है। चारों ओर फैली हरियाली, साल के ऊंचे वृक्षों की छाया और टाइगर रिजर्व को स्पर्श करती कल-कल बहती गंडक नदी का निर्मल जल पर्यटकों को सुकून प्रदान कर रहा है। जो पर्यटक किसी कारणवश जंगल सफारी नहीं कर पा रहे हैं, वे भी वीटीआर के दर्जनों पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद बिना किसी विशेष टिकट बुकिंग के उठा सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष वीटीआर का पर्यटन सत्र 29 जून को समाप्त हुआ था। बरसात का मौसम वन्यजीवों के प्रजनन का समय होने के साथ-साथ वन पथों के क्षतिग्रस्त होने का भी दौर होता है। इसी कारण प्रतिवर्ष मानसून के दौरान जंगल सफारी बंद कर दी जाती है। सफारी बंद होने के बावजूद कुछ पर्यटन सुविधाएं जारी रहती हैं, जिनका लाभ उठाने के लिए पर्यटक मानसून के दौरान भी वाल्मीकिनगर पहुंचते हैं।

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