

एआई अलर्ट से मिलेगी त्वरित सूचना, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने की दिशा में बड़ा कदम।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। जंगल से सटे बाहरी क्षेत्रों में अब 30 अत्याधुनिक स्मार्ट सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह पहल वन्यजीवों की गतिविधियों की सटीक निगरानी, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और वन अपराधों पर नियंत्रण के उद्देश्य से की जा रही है। प्रथम चरण में वन प्रमंडल-1 क्षेत्र में 15 कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में वन प्रमंडल-2 में 15 कैमरों की स्थापना की जाएगी।
वन प्रमंडल-2 के डीएफओ विकास अहलावत ने बताया कि कई बार बाघ, तेंदुआ, भालू जैसे हिंसक वन्यजीव जंगल की सीमा पार कर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। नई तकनीक से लैस कैमरे ऐसे वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे और वन विभाग को समय रहते सूचना उपलब्ध कराएंगे, जिससे त्वरित कार्रवाई कर वन्यजीवों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सकेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित अलर्ट सिस्टम है। स्मार्ट कैमरे बाघ, तेंदुआ, भालू समेत अन्य वन्यजीवों की पहचान कर उनकी मौजूदगी की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। इससे वन विभाग की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ेगी और संभावित खतरे को समय रहते नियंत्रित किया जा सकेगा। वन अधिकारियों के अनुसार कैमरे दिन और रात दोनों समय प्रभावी ढंग से कार्य करेंगे। इन्हें नदियों और नालों के किनारे, जंगल के चौराहों तथा वन्यजीवों की अधिक आवाजाही वाले मार्गों पर स्थापित किया जाएगा। इन कैमरों के जरिए वन्यजीवों की उपस्थिति, उनके मूवमेंट और व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिससे जैव विविधता के अध्ययन और संरक्षण योजनाओं को नई दिशा मिलेगी। आधुनिक कैमरे अवैध शिकार और जंगलों में होने वाली संदिग्ध मानवीय गतिविधियों पर भी नजर रखेंगे। रिकॉर्ड होने वाले वीडियो और डाटा के आधार पर वन अपराधों की पहचान और रोकथाम में मदद मिलेगी। साथ ही, यह प्रणाली संभावित टाइगर कॉरिडोर की पहचान में भी उपयोगी साबित होगी। वन विभाग का मानना है कि इन हाईटेक कैमरों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उन मार्गों की पहचान की जा सकेगी, जिनका उपयोग बाघ और अन्य वन्यजीव रिजर्व क्षेत्र से बाहर आने-जाने के लिए करते हैं। इससे सुरक्षित वन्यजीव गलियारों के विकास और संरक्षण प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह पहल वीटीआर में वन्यजीव संरक्षण को नई तकनीकी ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।










