चमकी बुखार के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का बड़ा अभियान।

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9 जून से गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता रथ, बच्चों की सुरक्षा के लिए घर-घर चलेगा सर्वे

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर: चमकी बुखार (एईएस/जेई) के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। बच्चों को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 9 जून 2026 से प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों और पंचायतों में विशेष जागरूकता रथ का संचालन किया जाएगा। यह रथ गांव-गांव घूमकर लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव के उपाय और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जानकारी देगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार जागरूकता रथ सिधाव, सिरिसिया, तीनफेड़िया तथा वाल्मीकिनगर क्षेत्र में भ्रमण करेगा। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित क्षेत्रों की सभी आशा फैसिलिटेटर एवं आशा कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें जेई सर्वे रजिस्टर के साथ घर-घर सर्वेक्षण कार्य पूरा करने के बाद जागरूकता रथ के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय चमकी बुखार के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। विशेष रूप से 1 वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आने के अधिक जोखिम में रहते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में बताया गया है कि बेहोशी, तेज बुखार, शरीर में झटके आना तथा असामान्य व्यवहार चमकी बुखार के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय गंवाए बिना तत्काल एम्बुलेंस सेवा एवं निकटतम अस्पताल से संपर्क करने की सलाह दी गई है। प्राथमिक उपचार के रूप में बच्चे को छायादार स्थान पर लिटाने, शरीर को पानी से पोंछकर ठंडा रखने, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पैरासिटामोल देने तथा ओआरएस घोल पिलाने की बात कही गई है। मरीज को करवट कर लिटाने की भी सलाह दी गई है ताकि किसी प्रकार की जटिलता से बचाव हो सके। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से आपात स्थिति में 102 एम्बुलेंस सेवा पर तुरंत कॉल करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि “आशा, अस्पताल और एम्बुलेंस”के बीच त्वरित समन्वय ही चमकी बुखार से होने वाली गंभीर परिस्थितियों को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इस बाबत प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी केबीऐन सिंह ने बताया कि इस विशेष जागरूकता अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और समय पर उपचार मिलने से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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