

सांसद सुनील कुमार एवं फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के एमडी रिटायर्ड मेजर जनरल असीम कोहली ने किया अनावरण, भारत-नेपाल सीमा पर लहराएगा गौरव का प्रतीक।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- (पश्चिमी चंपारण)। बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थल और एकमात्र टाइगर रिजर्व वाल्मीकिनगर को मंगलवार की शाम एक नई और ऐतिहासिक पहचान मिली। वाल्मीकि सभागार (कन्वेंशन सेंटर) परिसर में 108 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज स्तंभ पर विशाल तिरंगे का अनावरण वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार तथा फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) रिटायर्ड मेजर जनरल असीम कोहली ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर को क्षेत्र के विकास, पर्यटन संवर्धन और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। भारत-नेपाल सीमा से सटे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वाल्मीकिनगर में स्थापित यह भव्य तिरंगा अब दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। गंडक बराज, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, घने जंगलों और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों के बीच लहराता राष्ट्रीय ध्वज क्षेत्र की भव्यता को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल असीम कोहली ने बताया कि फिलहाल 16×24 फीट का तिरंगा फहराया गया है। भविष्य में इसकी जगह 30×45 फीट का और अधिक विशाल तिरंगा लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बगहा के बाद वाल्मीकिनगर में इस ध्वज की स्थापना गर्व का विषय है, क्योंकि यह स्थान अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ है और राष्ट्रीय गौरव का संदेश देता है। इस अवसर पर सांसद सुनील कुमार ने अपने दिवंगत पिता एवं पूर्व सांसद को याद करते हुए कहा कि संयोगवश यह कार्यक्रम उनके पिता की जयंती के दिन आयोजित हुआ है, जिससे यह क्षण उनके लिए और भी भावनात्मक एवं विशेष बन गया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने क्षेत्र के विकास के लिए जो सपने देखे थे, उन्हें पूरा करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उद्घाटन समारोह में जदयू प्रवक्ता राकेश सिंह, वरिष्ठ नेता वीरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, पारसनाथ तिवारी तथा अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल देश की आन-बान और शान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम का संदेश भी देता है। 108 फीट की ऊंचाई पर लहराता तिरंगा युवाओं में देशभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करेगा।

स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि इस पहल से वाल्मीकिनगर की पर्यटन पहचान को नई मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से शाम के समय रोशनी से सुसज्जित यह विशाल तिरंगा पर्यटकों को आकर्षित करेगा। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे प्रेरणादायक और प्रतीकात्मक स्थलों के विकास से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और व्यवसाय को भी नई गति मिलेगी।
108 फीट ऊंचा यह तिरंगा अब केवल एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि वाल्मीकिनगर की नई पहचान, गौरव और विकास का प्रतीक बन गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश देता रहेगा।










