

जंगल सफारी में प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों ने मोहा मन
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर: बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बीपार्ड) पटना से एक महीने का प्रशिक्षण प्राप्त कर “वॉटर रिसोर्स जल संसाधन विभाग” की 37 सदस्यीय टीम बिहार दर्शन के अंतिम चरण में रविवार को वाल्मीकिनगर पहुंची। यहां पहुंचते ही टीम के सदस्यों ने गंडक नदी के तटबंधों एवं बाढ़ रोकथाम के लिए कराए गए सुरक्षात्मक कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया। इसके बाद सभी कर्मियों ने जंगल सफारी का आनंद लेते हुए वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ वातावरण की सराहना की। टीम का नेतृत्व कर रहे अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि जल संसाधन विभाग के अंतर्गत नदियों के जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण तथा किसानों के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने से संबंधित योजनाओं पर कार्य किया जाता है। उन्होंने कहा कि बीपार्ड पटना में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान कर्मियों को प्रशासनिक कार्यशैली, अनुशासन, समय प्रबंधन एवं सहयोगियों के साथ व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं। प्रशिक्षण में समय पालन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का भी प्रावधान है। अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि वाल्मीकिनगर पहुंचकर टीम ने गंडक नदी किनारे विभाग द्वारा कराए गए तटबंध सुरक्षा कार्यों का भी अध्ययन किया, क्योंकि यही विभागीय कार्य उनके दायित्वों का प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यहां किए गए कार्यों को देखकर काफी सीखने का अवसर मिला। वाल्मीकिनगर की सुंदरता ने जीता दिल
पटना से आए नीरज कुमार, अमित कुमार श्रीवास्तव, पंकज कुमार एवं रंगनाथन सुदर्शन सहित अन्य कर्मियों ने वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक छटा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पहाड़, नदी और घने जंगलों से घिरा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बेहद मनमोहक प्रतीत होता है। टीम के सदस्यों ने वाल्मीकिनगर की तुलना कश्मीर की खूबसूरती से करते हुए कहा कि यहां का शांत वातावरण पर्यटकों को मानसिक सुकून प्रदान करता है। साथ ही वन विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की गई।
जंगल सफारी में वन्यजीवों का हुआ दीदार जंगल सफारी के दौरान टीम ने मोटर अड्डा वन क्षेत्र में चीतल तथा अपने शावकों के साथ घूम रहे भालुओं को देखा। वन्यजीवों को करीब से देखकर सभी सदस्य उत्साहित नजर आए। अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि बाघ का दर्शन नहीं हो सका, लेकिन अन्य वन्यजीवों का दीदार भी यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक सुंदरता इतनी आकर्षक है कि वे दोबारा अपने परिवार के साथ यहां घूमने अवश्य आएंगे।










