नेपाली महिलाओं को सात साल बाद मिलेगी पहचान, सीमावर्ती महिलाओं के लिए खुला नागरिकता का रास्ता।

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वाल्मीकिनगर में विशेष शिविर से जगी उम्मीद, प्रक्रिया की जानकारी पाकर महिलाओं में उत्साह।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- सीमावर्ती क्षेत्र की नेपाली मूल की विवाहिता महिलाओं के लिए बुधवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया, जब वाल्मीकिनगर पंचायत भवन परिसर में भारतीय नागरिकता को लेकर विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का उद्देश्य भारत में रह रही और भारतीय नागरिकों से विवाह कर चुकी महिलाओं को नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराना था। प्रखंड विकास पदाधिकारी बिडू कुमार राम ने बताया कि भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत पंजीकरण के माध्यम से ऐसी महिलाएं नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि महिला का विवाह भारतीय नागरिक से हुआ हो और वह कम से कम सात वर्षों से भारत में निवास कर रही हो। इस प्रावधान से इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में रहने वाली हजारों महिलाओं को कानूनी पहचान मिलने की राह आसान होगी। सरकार के इस फैसले से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वर्षों से पहचान के अभाव में जीवन गुजार रही महिलाओं ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अब उन्हें न केवल वैधानिक पहचान मिलेगी, बल्कि वे अपने अधिकारों का भी पूर्ण रूप से उपयोग कर सकेंगी। इससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। शिविर में अधिकारियों ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जिसे गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। आवेदन शुल्क 1000 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके साथ पासपोर्ट, निवास प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र और जीवनसाथी के भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी झेलने वालों के लिए साइबर कैफे और सीएससी केंद्रों की मदद लेने की सलाह दी गई। प्रखंड प्रशासन इस अभियान को सफल बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हालांकि दस्तावेजों की जटिलता के कारण शिविर में अपेक्षित भीड़ नहीं देखी गई, फिर भी कई महिलाएं अपने परिजनों के साथ पहुंचीं और जानकारी हासिल की। प्रशासन को उम्मीद है कि जागरूकता बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में अधिक लोग इसका लाभ उठाएंगे। यह पहल केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वर्षों से पहचान के लिए संघर्ष कर रही महिलाओं के आत्मसम्मान और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है, जो अब साकार होता नजर आ रहा है। मौके पर कार्यपालक सहायक विजय सहनी, सोनू कुमार विकास मित्र सीमा कुमारी, आदि मौजूद रहे।

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