

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। दोनों देशों के सुरक्षा बलों ने सीमा पार आवाजाही करने वाले लोगों की जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब पैदल यात्रियों तक को जांच प्रक्रिया में शामिल कर लिया है। इस कदम के बाद सीमा पर गतिविधियों में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है।
अब भारत से नेपाल और नेपाल से भारत आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले जहां पैदल या साइकिल से आने-जाने वालों की एंट्री नहीं होती थी, वहीं अब हर व्यक्ति को इस प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य हो गया है। इस संबंध में उप निरीक्षक केशवानंद शर्मा ने बताया कि सीमा पर आने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान पत्र के प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। चाहे वह पैदल हो या वाहन से, सभी की समान रूप से जांच की जा रही है। इस सख्ती का असर यह है कि भारतीय सीमा के गंडक बराज एक नंबर फाटक पर एंट्री और बैग जांच के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। दूसरी ओर, नेपाल सरकार के हालिया फैसले ने नेपाली नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार द्वारा 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार (कस्टम ड्यूटी) अनिवार्य करने के आदेश के बाद लोगों में आर्थिक बोझ का डर सताने लगा है। हालांकि अभी तक इस नियम का सख्ती से पालन होते नहीं देखा गया है, लेकिन आदेश जारी होने के बाद से ही लोगों में आशंका बढ़ गई है। गौरतलब है कि सीमावर्ती नेपाली नागरिक बड़े पैमाने पर भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते हैं, जहां उन्हें अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर दैनिक उपयोग की वस्तुएं मिल जाती हैं। यदि भंसार लागू होता है, तो उन्हें महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, नेपाल जाने वाले भारतीय वाहनों के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं। नेपाल एपीएफ के इंस्पेक्टर तेज बहादुर मगर के अनुसार, 6 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए गंडक बराज पर ही अस्थायी सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इससे अधिक दूरी तय करने के लिए भंसार कराना अनिवार्य कर दिया गया है। नियम का उल्लंघन करने पर दूरी के अनुसार जुर्माना भी लगाया जाएगा।
सीमा पर बढ़ी यह सख्ती सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से अहम मानी जा रही है, हालांकि इसका सीधा असर आम लोगों की दैनिक आवाजाही पर भी पड़ रहा है।










