

विवेक कुमार सिंह जिला ब्यूरो बेतिया
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- नेपाल के तराई क्षेत्र से लेकर भारत-नेपाल सीमा तक बुधवार से मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। झमाझम बारिश, तेज हवाओं और घने बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया, जिससे लोगों को एक बार फिर ठंड का एहसास होने लगा है। मौसम विभाग ने इसे “डबल अटैक” की स्थिति बताते हुए आगामी 8 और 9 अप्रैल को विशेष सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमीयुक्त हवाओं के संयुक्त प्रभाव से बिहार समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में खतरनाक मौसमी परिस्थितियाँ बन गई हैं। इसके साथ ही सक्रिय चक्रवातीय परिसंचरण के कारण वायुमंडल में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे आने वाले 3 से 4 दिनों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है। वाल्मीकिनगर मौसम विभाग के पर्यवेक्षक पंकज कुमार ने बताया कि पश्चिमी चंपारण सहित राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश, वज्रपात, तेज आंधी और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की प्रबल संभावना है। खासकर 8 और 9 अप्रैल को मौसम की तीव्रता अधिक रहेगी। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेताया है कि ऐसी परिस्थितियों में पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और फसलों को भारी नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है। आम लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान घरों में ही रहें, खुले स्थानों पर जाने से बचें और वज्रपात के समय सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। साथ ही पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें। किसानों के लिए यह अलर्ट बेहद अहम है। विभाग ने अपील की है कि तैयार फसलों की जल्द कटाई कर सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करें। खेतों में रखी उपज को ढंककर या सुरक्षित स्थान पर रखकर संभावित बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान को कम किया जा सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आनंद शंकर ने कहा कि विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करना जरूरी है। वहीं कृषि वैज्ञानिक विनय कुमार सिंह के अनुसार तेज हवा और बारिश से गेहूं की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है, खासकर उन किसानों को जिनकी फसल तैयार या कटी हुई है। कुल मिलाकर, मौसम का यह बदलता रुख आने वाले दिनों में चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।










