

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर: चैत्र पूर्णिमा एवं हनुमान जयंती के पावन अवसर पर भारत-नेपाल सीमा स्थित बेलवा घाट परिसर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठा, जब अंतर्राष्ट्रीय न्यास स्वरांजलि सेवा संस्थान द्वारा 153वीं नारायणी गंडकी महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रेंजर सत्यम कुमार एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
महाआरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। “जय श्री राम” और “हनुमान जी महाराज की जय” के उद्घोष से पूरा घाट परिसर गूंजता रहा। मुख्य अतिथि सत्यम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि चैत्र पूर्णिमा का दिन हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है और भगवान हनुमान की भक्ति से व्यक्ति को अद्भुत शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सभ्यता का विकास नदियों के किनारे हुआ है और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सुंदरता की दृष्टि से अद्वितीय है। वर्ष 2014 से निरंतर आयोजित हो रही यह महाआरती जनजागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

विशिष्ट अतिथि मुखिया खूब लाल बड़घडिया ने पूर्णिमा के दिन संगम तट पर पूजा-अर्चना को सौभाग्यपूर्ण बताया। समाजसेवी संगीत आनंद ने संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी कार्यक्रमों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से आयोजित किया जाता है तथा अतिथियों को औषधीय पौधे भेंट कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जाता है। दिनेश पटवारी एवं निर्माता एचेल थारू ने भी प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा और जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया। कार्यक्रम में सामाजिक सेवा की भावना भी प्रमुख रूप से देखने को मिली। संस्था द्वारा लावारिस दिव्यांगों को भोजन उपलब्ध कराने तथा बिछड़े लोगों को उनके परिवार से मिलाने की पहल की जानकारी साझा की गई। स्वास्थ्य कर्मी कुमारी संगीता ने नारायणी नदी की धार्मिक महत्ता बताते हुए कहा कि इसमें मिलने वाले शालिग्राम पत्थर भगवान विष्णु का स्वरूप माने जाते हैं। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सत्येंद्र कुमार पांडे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन चंद्रभान कुमार एवं जयदेव कुमार ने किया। अंत में आचार्य पंडित अनिरुद्ध द्विवेदी द्वारा विधि-विधान से पूजा, कथा एवं हवन कर विश्व शांति की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में विश्व में चल रहे युद्धों की समाप्ति और मानवता के कल्याण हेतु नारायणी गंडकी माता से प्रार्थना की।










