बुद्धि का खेल -: पं० भरत उपाध्याय

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एक बैंक डकैती के दौरान डाकुओं ने कहा :” सभी अपने हाथों को ऊपर कर लो!क्योंकि यह पैसा देश का है पर जान आपकी अपनी है”,… यह है ब्रेन वाश करना….. डकैती के दौरान एक महिला बदहवास सी हो गयी तो डाकू बोला..” सभ्यता का परिचय दो, यह केवल डकैती है कोई बलात्कार नहीं” यह है प्रोफेशनल होना……. 20 लाख रुपए लूट कर जब घर गए तो छोटा वाला डाकू बोला…आओ पैसे गिनते है,तो बड़े वाले ने कहा : ” कल न्यूज में आ जायेगी गिनने की क्या जरूरत “….. यह है अनुभव.लुटने के बाद बैंक मेनेजर ने खजांची को बुलाया और कहा :” रुक पुलिस बुलाने से पहले 10 लाख निकाल के मेरे साले को देदे”..यह है बहती गंगा में हाथ साफ करना.. खजांची बोला : ओके… एक करोड़ चोरी हुए है ऐसा रिपोर्ट में लिखवाता हूं ताकि अपने पिछले 70 लाख डूबे हुए भी कवर हो जायेंगे…यह है मौके पे चौका… अगले दिन न्यूज में आया ” सिटी बैंक में एक करोड़ की डकैती”… डाकुओं ने बार बार गिने लेकिन 20 लाख ही निकले। डाकू बोले हमने जान पर खेल कर सिर्फ 20 लाख लूटे, लेकिन  मैनेजर ने एक झटके में 80 लाख….. इसे कहते है “ज्ञान सोने से ज्यादा मूल्यवान है

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